दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार की शिकायत अपील समिति (जीएसी) को निर्देश दिया कि वह शिरडी साईं बाबा को निशाना बनाने वाले कथित रूप से भड़काऊ और आपत्तिजनक यूट्यूब वीडियो को हटाने की मांग वाली शिकायत पर विचार करे। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, शिकायत अपीलीय समिति (जीएसी) और गूगल को नोटिस जारी कर इस संबंध में नया आवेदन दाखिल करने वाले श्री साईबाबा संस्थान न्यास, शिरडी की याचिका पर जवाब मांगा है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने जीएसी को सात दिनों के भीतर आपत्तिजनक वीडियो हटाने के मुद्दे पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को सूचित किया कि जीएसी ने 13 अगस्त को ही एक आदेश पारित कर ऐसे वीडियो और लेखों को हटाने का निर्देश दे दिया है। हालांकि, याचिकाकर्ता न्यास का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद दुबे और अधिवक्ता प्राची दुबे ने दलील दी कि आपत्तिजनक सामग्री को पूरी तरह से नहीं हटाया गया है और कुछ वीडियो तथा लेख अब भी इंटरनेट पर मौजूद हैं। प्राची दुबे ने जीएसी के उस निष्कर्ष को भी पढ़कर सुनाया, जिसमें समिति ने माना था कि विवादित सामग्री धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने वाली है, तथा यदि इसे ऐसे ही रहने दिया गया तो यह जल्द ही एक महामारी की तरह फैल जाएगी जिसके परिणाम अनियंत्रित होंगे।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर तय करते हुए कहा कि इस बीच यदि कोई नई शिकायत दर्ज की जाती है, तो संबंधित प्राधिकरण उस पर विचार करेगा।
