बांग्लादेश की राजनीति में इस वक्त जो उथल-पुथल मची है उसमें एक बार फिर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की एंट्री हो गई। भारत में मौजूद शेख हसीना ने चुप्पी तोड़ी और द संडे गार्डियन को एक इंटरव्यू में ढाका की मौजूदा सरकार और वहां की प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आईना दिखाया। हसीना ने साफ शब्दों में कहा कि भारत के साथ दोस्सी करना दिल्ली पर कोई एहसान नहीं है बल्कि यह खुद बांग्लादेश के हित में है। उन्होंने तारिक रहमान और मोहम्मद यूनुस पर तीखे सवाल किए और बताया कि कैसे बांग्लादेश आर्थिक बर्बादी की ओर बढ़ा है। दरअसल शेख हसीना का सबसे बड़ा हमला उन लोगों पर था जो भारत बांग्लादेश के संबंधों को सियासी फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। शेख हसीना ने दो टूक कहा कि ढाका में जो भी सरकार हो उसे यह समझना होगा कि भारत हमारा सबसे बड़ा पड़ोसी है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ अच्छे रिश्ते दिल्ली पर एहसान नहीं है बल्कि यह बांग्लादेश के अपने राष्ट्रीय हित में है। हसीना ने याद दिलाया कि यह रिश्ता सिर्फ व्यापार का नहीं बल्कि 1971 के बलिदान साझा संस्कृति, नदियों और सुरक्षा का है। हसीना के मुताबिक उनके कार्यकाल में भारत के साथ भरोसे का ढांचा तैयार किया गया था। जिसे अब मौजूदा सरकार ख़तरे में डाल रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता के सिर्फ चेहरे बदले हैं नियत नहीं।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारतीय मीडिया के साथ अपने पहले टेलीफ़ोनिक इंटरव्यू में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार के उस कदम पर सवाल उठाए हैं, जिसमें उनके प्रत्यर्पण को प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई दिल्ली की संभावित यात्रा से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा है कि वह दिसंबर तक खुद ही घर लौटना चाहती हैं। एक अज्ञात जगह से हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए हसीना ने बीएनपी सरकार के उस फ़ैसले पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत चीन से 2.3 अरब डॉलर की डील में लड़ाकू विमान खरीदे जा रहे हैं। यह फ़ैसला ऐसे समय में लिया गया है जब बांग्लादेश बिजली और गैस की कमी, खाद की किल्लत और महंगाई के संकट से जूझ रहा है।
बांग्लादेश सरकार का कहना है कि 5 अगस्त को भारतीय ज़मीन से आपकी प्रेस कॉन्फ्रेंस ने प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान के दौरे की तैयारियों को खराब कर दिया और ढाका ने इस दौरे के लिए आपके प्रत्यर्पण को एक शर्त बना दिया है। इन घटनाक्रमों पर शेख हसीना ने कहा कि मैंने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इससे दो देशों के रिश्तों में क्या समस्या हो सकती है? तारिक़ रहमान ने एक स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर किए थे और यह वचन दिया था कि जब वे 2007 में [बांग्लादेश छोड़कर] ब्रिटेन जाएंगे तो राजनीति नहीं करेंगे। उन्होंने लंदन से राजनीति की और अपनी माँ [खालिदा ज़िया] की जगह अपनी पार्टी के चेयरमैन के तौर पर काम किया। उन्होंने वीडियो-कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए सार्वजनिक और पार्टी की बैठकों में हिस्सा लिया। क्या मैंने कभी ब्रिटिश सरकार से कहा कि वे मेरे देश के एक भगोड़े को ऐसी बैठकें करने से रोकें? मैंने कभी ऐसा आरोप नहीं लगाया। उन्हें क्या समस्या है?
अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिस तरह से परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा है और उनके घरों पर हमले हो रहे हैं — इसकी शुरुआत [अंतरिम सरकार के प्रमुख] मुहम्मद यूनुस ने की थी और [बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी] इसे जारी रखे हुए है। ऐसा कोई दिन नहीं बीतता जब लोगों की हत्या न हो रही हो। रंगपुर का ही मामला ले लीजिए, जहाँ एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या कर दी गई, और बोगुरा शहर में हमारी युवा शाखा के एक सदस्य की जिस तरह से हत्या की गई। वे हर दिन और हर रात हमारी पार्टी के लोगों की हत्या कर रहे हैं, उन्हें गिरफ्तार कर रहे हैं या उन पर मामले दर्ज कर रहे हैं। वे घरों में घुसकर पुरुषों और महिलाओं पर हमला कर रहे हैं, और बुजुर्गों को पीटकर परेशान कर रहे हैं। ऐसे हालात में, मुझे समझ नहीं आ रहा कि मेरे प्रत्यर्पण की शर्त कैसे रखी जा सकती है।