नयी दिल्ली, छह अक्टूबर विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार एविएशन टर्बाइल फ्यूल (एटीएफ) के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष को फिर शुरू करने की संभावना पर विचार कर रही है। साथ ही, ऊंची एटीएफ लागत को लेकर एयरलाइन कंपनियों और पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के साथ बातचीत भी जारी है। विमान ईंधन किसी एयरलाइन के परिचालन खर्च का करीब 40 प्रतिशत होता है और पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में एक सम्मेलन से इतर कहा, ‘‘सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक यह है कि पश्चिम एशिया संकट एटीएफ की कीमतों पर किस तरह बड़ा बोझ डाल रहा है। हम विमानन कंपनियों और ओएमसी (पेट्रोलियम विपणन कंपनियों) के साथ बातचीत कर रहे हैं।’’
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सरकार एटीएफ के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष रखने की संभावना पर विचार कर रही है। हालांकि, इस बारे में तत्काल कोई विशेष जानकारी नहीं मिल सकी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जून में घरेलू विमानन कंपनियों को समर्थन देने के लिए पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को एटीएफ की कीमत स्थिर रखने के वास्ते 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की एकमुश्त बजटीय सहायता को मंजूरी दी थी। विमानन कंपनियां हालांकि इस कोष का लाभ लेने को लेकर इच्छुक नहीं थीं और अब यह योजना समाप्त हो चुकी है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने सोमवार को विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन अधिभार बढ़ाने की घोषणा की।
इंडिगो ने कहा था कि विमान ईंधन की कीमतें हाल के महीनों में अस्थिर रही हैं, खासकर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति के बाद। एयरलाइन के अनुसार, ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है जो हाल में मासिक आधार पर 14 प्रतिशत से अधिक रही है। इससे एटीएफ की लागत पिछले एक दशक में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) ने मौजूदा विमान ईंधन मूल्य निर्धारण तरीके की समीक्षा करने की पिछले महीने मांग की थी।
