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Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
पंजाब के तरनतारन इलाके में भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने देर रात घुसपैठ की कोशिश कर रहे दो संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिकों को मार गिराया। घटना रात करीब 12:30 बजे राजोके इलाके में हुई। फिलहाल वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से यह जानकारी साझा नहीं की गई है कि मारे गए संदिग्धों के पास से क्या बरामद हुआ है।रात के अंधेरे में भारतीय सीमा में घुसने की कोशिशमिली जानकारी के मुताबिक, राजोके इलाके में सीमा पर तैनात जवानों ने कंटीली तार के पार कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखीं। करीब तीन संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिक रात के अंधेरे का…
काकामिगाहारा, दो अक्टूबर भारतीय पुरूष हॉकी टीम को मलेशिया के खिलाफ एशियाई खेलों के फाइनल में शनिवार को अपना खिताब बरकरार रखने और लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 का टिकट कटाने के लिये गलतियों से सबक लेकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। भारतीय टीम ने कभी लगातार दो एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक नहीं जीता है और उसके पास शनिवार को यह कामयाबी हासिल करके भारतीय हॉकी का सुनहरा अध्याय लिखने का मौका है। सेमीफाइनल में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ लचर प्रदर्शन के बाद अब मलेशिया के खिलाफ उन गलतियों को दोहराने से बचना होगा।पाकिस्तान के खिलाफ 23वें मिनट तक तीन…
Bloating can become so routine that many people stop noticing it as a symptom. A tighter waistband after lunch, a visibly distended abdomen by evening or persistent abdominal discomfort is often dismissed as normal digestion. But recurring bloating can sometimes be linked to everyday eating, drinking and lifestyle habits.In an interview with HT Lifestyle, Dr Vineet K Gupta, Senior Consultant & Unit Head, ShardaCare – HealthCity, explains some of the overlooked habits that may contribute to bloating and when the symptom warrants medical attention. (Also read: Heart surgeon with 25 years of experience says this is one of the hardest…
अहमदाबाद, दो अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर महात्मा गांधी के जीवन के एक कम चर्चित अध्याय और उनके करीबी सहयोगी अब्दुल कादिर बावाजिर के साथ उनके रिश्ते को अहमदाबाद में याद किया जा रहा है जिसमें सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल नजर आई थी। बापू के करीबी सहयोगी अब्दुल कादिर बावाजिर को लोग इमाम बावाजिर के नाम से जानते थे। बावाजिर के साथ महात्मा गांधी का गहरा संबंध था और वह उन्हें अपना ‘‘सहोदर’’ यानी भाई मानते थे।उनका रिश्ता साम्प्रदायिक सद्भाव की भावना का उदाहरण माना जाता है। अहमदाबाद के इतिहासकार रिजवान कादरी ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका में गांधी…
नयी दिल्ली, दो अक्टूबर समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रमाशंकर राजभर ने शुक्रवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर को ‘‘वोट का सौदागर’’ करार दिया और कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी ‘ब्लैकमेलिंग’ नहीं चलनी वाली है क्योंकि समाज और सभी दल उनकी सच्चाई जान चुके हैं। उत्तर प्रदेश के सलेमपुर से लोकसभा सदस्य रमाशंकर राजभर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में यह भी कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय है कि जाति आधारित दलों के नेताओं के साथ गठबंधन का अनुभव हो चुका है और अब सपा को ‘‘जातियों के नेताओं’’ के बजाय…
भारतीय खानपान में मिठाइयां खास मौके या शादी की दावतों में रौनक बढ़ाती हैं। खाने के साथ रसगुल्ले का हो या गुलाब जामुन की। हर एक मिठाई का अपना स्वाद होता है। रसगुल्ला का नाम याद आता है, तो बंगाल का स्वाद सबके जुबान पर आ जाता है।लेकिन सिर्फ रसगुल्ला ही नहीं, बल्कि बंगाल की फेमस ‘भापा दोई’ भी वहां की एक खास पहचान मानी जाती है। असल में भापा दोई पारंपरिक रुप से भाप पकाकर तैयार की जाने वाली बंगाली मिठाई है, जो मुंह जाते ही घुल जाती है। आइए आपको इसकी आसान रेसिपी के बारे में बताते हैं।भापा…
रायपुर, दो अक्टूबर छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष सीआर पाटिल को पत्र लिखकर उड़ीसा स्थित खातीगुड़ा बांध से अचानक पानी छोड़े जाने के कारण बस्तर संभाग में उत्पन्न भीषण बाढ़ की स्थिति से अवगत कराया और प्रभावितों के लिए विशेष राहत एवं मुआवजा पैकेज की मांग की। भाजपा पदाधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। देव ने पत्र में कहा कि इंद्रावती जलाशय (खातीगुड़ा बांध) से अग्रिम चेतावनी और उचित अंतर-राज्यीय समन्वय के बिना भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से इंद्रावती…
एशियन गेम्स 2026 में भारत के पहलवान सुजीत कलकल ने 65 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीत लिया है। फाइनल में उनका सामना ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुदिएव से हुआ। मुकाबले में एक समय सुजीत 2-9 से पीछे थे, लेकिन उन्होंने आखिरी 11 सेकेंड में शानदार दांव लगाकर स्कोर पलट दिया और 10-9 से मुकाबला अपने नाम कर लिया।पहले पीरियड में कुदिएव का दबदबाफाइनल की शुरुआत सुजीत के लिए मुश्किल रही। कुदिएव ने शुरुआत में ही उन्हें मैट से बाहर कर दो अंक हासिल किए। इसके तुरंत बाद उन्होंने दो और अंक लेकर अपनी बढ़त 4-0 कर ली।सुजीत ने इसके…
Is it possible to live and let live when you are committed to building a life together? In a culture that promotes being “one entity” as a couple, can one even allow oneself to follow a different growth path, which is not similar to your partner’s?Post pandemic, Bengaluru-based lawyer Dina (37), a client of mine has been on a path to downsizing her life. Ved (37), her entrepreneur husband, has seen his venture flourish since then. He wants to flaunt his success by supersizing acquisitions, making grand social gestures and maximising their lifestyle.For Dina and Ved, the minimalist and maximalist…
From the comfort of a full stomach, it seems churlish to complain about urea. So, let me acknowledge that without Messrs Haber and Bosch’s gift of synthetic urea half of humanity would likely have starved.Synthetic urea was not just vital, it was seductive.Now, it was not necessary to gather and manage food waste, urine and faeces to turn them into manure. Or plant nitrogen-fixers such as pulses, clover or dhaincha, wait for them to grow and mulch them back into the field. Synthetic urea compressed all that labour and waiting into the time, effort and cost of buying and spreading…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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