नयी दिल्ली, दो अक्टूबर समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रमाशंकर राजभर ने शुक्रवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर को ‘‘वोट का सौदागर’’ करार दिया और कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी ‘ब्लैकमेलिंग’ नहीं चलनी वाली है क्योंकि समाज और सभी दल उनकी सच्चाई जान चुके हैं। उत्तर प्रदेश के सलेमपुर से लोकसभा सदस्य रमाशंकर राजभर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में यह भी कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय है कि जाति आधारित दलों के नेताओं के साथ गठबंधन का अनुभव हो चुका है और अब सपा को ‘‘जातियों के नेताओं’’ के बजाय सीधे विभिन्न सामाजिक समूहों से राजनीतिक जुड़ाव बढ़ाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ओम प्रकाश राजभर वोट के सौदागर हैं।
राजभर समाज के लोग अब समझ चुके हैं कि उन्होंने इस समुदाय के नाम पर राजनीति की, लेकिन अपने परिवार को आगे बढ़ाया।’’
सपा नेता ने कहा कि 2019 में ओम प्रकाश राजभर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ थे, जबकि 2022 में वह सपा गठबंधन में आए और 2024 के लोकसभा चुनाव में फिर भाजपा के साथ चले गए। उन्होंने दावा किया कि इन राजनीतिक समीकरणों के बावजूद पिछले लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल में सपा को नुकसान नहीं हुआ और पार्टी ने कई सीटों पर जीत हासिल की। रमाशंकर राजभर ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जाति आधारित छोटे दलों की ‘‘ब्लैकमेलिंग’’ खत्म हो जाएगी, क्योंकि बड़े राजनीतिक दल पहले से अधिक सतर्क हैं और केवल सीटों के सौदे के आधार पर निर्णय नहीं करेंगे।
उन्होंने ओम प्रकाश राजभर द्वारा पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग किए जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा कि राजभर समुदाय की प्राथमिकता आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में भागीदारी है। उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव संभावित है।
