नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से बाहर किए गए 19 लाख लोगों को अस्वीकृति पर्चियां जारी करने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है, क्योंकि अंतिम एनआरसी को अभी औपचारिक रूप से अधिसूचित किया जाना बाकी है। अगस्त 2019 में जारी ‘अंतिम राष्ट्रीय नागरिक पंजी’ के अनुसार, 19.07 लाख आवेदकों के नाम सूची से बाहर कर दिए गए थे, जबकि 3.11 करोड़ आवेदकों के नाम एनआरसी में शामिल किए गए थे। उच्चतम न्यायालय में दाखिल एक हलफनामे में भारत के महापंजीयक ने कहा कि राज्य एनआरसी समन्वयक अब भी एनआरसी के आंकड़ों को सुरक्षित रखने के लिए एक ‘‘सुरक्षा व्यवस्था’’ तैयार करने पर काम कर रहे हैं।
हलफनामे में कहा गया है कि आंकड़े अभी तक महापंजीयक को नहीं सौंपे गए हैं और वह इन्हें प्राप्त करने के बाद ही अंतिम एनआरसी को अधिसूचित कर सकते हैं। उच्चतम न्यायालय ने पहले राज्य एनआरसी समन्वयक को अंतिम सूची से बाहर किए गए लोगों को अस्वीकृति पर्चियां जारी करने के लिए एक व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया था, ताकि वे अपने नाम खारिज किए जाने को संबंधित न्यायाधिकरणों में चुनौती दे सकें। इसके बाद राज्य एनआरसी समन्वयक ने अक्टूबर 2020 में भारत के महापंजीयक (आरजीआई) को बताया था कि अस्वीकृति पर्चियां तभी जारी की जा सकती हैं, जब आरजीआई अंतिम एनआरसी को अधिसूचित कर दें।
असम सरकार द्वारा अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने के बाद उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई छह नवंबर तक टाल दी। उच्चतम न्यायालय असम राज्य जमीयत उलेमा, ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाओं में एनआरसी से बाहर किए गए लोगों को अस्वीकृति पर्चियां और अंतिम सूची में शामिल लोगों को एनआरसी कार्ड जारी करने का अनुरोध किया गया है।
