केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि मोदी सरकार ने तुर्की से कुख्यात नशीले पदार्थों के तस्कर नवप्रीत सिंह को वापस लाकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि ‘नवाब विर्क’ की फर्जी पहचान के तहत तुर्की की नागरिकता हासिल करने के बाद भी वह अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथामफेटामाइन की तस्करी करता रहा। उन्होंने कहा कि हमारी एजेंसियों ने उसकी असली पहचान का पता लगाने के लिए एक-एक करके कई परतें हटाईं और उसे डिपोर्ट करवाकर वापस लाया गया। आज उसे भारत वापस लाकर ड्रग तस्करी और अन्य अपराधों के मामलों में जेल भेज दिया गया है, जिनके लिए उस पर आरोप हैं। इस कामयाबी के लिए सभी एजेंसियों को बधाई। मोदी सरकार दिसंबर 2029 से पहले हर नार्को-कार्टेल को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। अब, ड्रग तस्करी और दूसरे कथित अपराधों के मामलों में नवप्रीत सिंह को देश वापस लाया गया है और हिरासत में रखा गया है।
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नवप्रीत सिंह के बारे में सब कुछ जानें?
‘नव’ के नाम से पहचाने जाने वाले नवप्रीत सिंह का नाम भारत, अफ़गानिस्तान और तुर्की के बीच चल रहे एक बड़े इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट की शुरुआती जांच में सामने आया था। जांच एजेंसियों का आरोप था कि वह इस नेटवर्क का तुर्की में बैठा सरगना था, जबकि उसका चचेरा भाई प्रभदीप सिंह भारत में इसके ऑपरेशन का मुख्य कड़ी था। उसके खिलाफ जांच 2021 में दक्षिण दिल्ली में रिज़वान कश्मीरी की गिरफ्तारी के साथ शुरू हुई थी। उससे हुई पूछताछ से जांच एजेंसियों को कई राज्यों और अफ़गान नागरिकों से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पता चला। बाद में इस जांच के दौरान फरीदाबाद में भारी मात्रा में हेरोइन बरामद हुई। अधिकारियों के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने एक गाड़ी से 166 किलोग्राम और दूसरी गाड़ी से 115 किलोग्राम हेरोइन बरामद की।
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अज़रबैजान से तुर्की तक जांच कैसे शुरू हुई
जांच एजेंसियों ने उस सिंडिकेट के खिलाफ़ कार्रवाई की जिसमें प्रभदीप सिंह का प्रत्यर्पण शामिल था। जांचकर्ताओं ने उसे नवप्रीत सिंह का चचेरा भाई और भारत में एक अहम ऑपरेशनल कड़ी बताया था। भारतीय जांच एजेंसियों ने मई में अज़रबैजान से प्रभदीप का प्रत्यर्पण सुनिश्चित किया, जब बाकू में एक फ़्लैट में उसका पता चला। उसके खिलाफ़ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी था। उसे CBI और दिल्ली पुलिस की एक स्पेशल टीम भारत वापस लाई, जिसमें विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय का सहयोग भी शामिल था।
