चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की रविवार को नयी दिल्ली की दो दिवसीय यात्रा संपन्न हो गयी। चिनफिंग ने यहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया और इसके इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। शी शनिवार को अधिकारियों और कारोबारियों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत पहुंचे थे।
करीब सात साल बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा थी। रविवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए शी ने कहा कि ब्रिक्स को उभरते बाजारों और ग्लोबल साउथ के साथ अपने करीबी संबंधों का लाभ उठाते हुए आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा और एक बड़े एकीकृत बाजार को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने व्यापार, विनिर्माण, निवेश और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए पांच सूत्री पहल का प्रस्ताव रखा।
शनिवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर मोदी और शी के बीच हुई बातचीत में व्यापार घाटा कम करने, आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने और बहुपक्षीय मंचों पर निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करने सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। चीनी पक्ष की ओर से जारी बैठक के विवरण के अनुसार, शी ने चीन-भारत संबंधों के स्थिर और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए चार विशेष बिंदु रखे। इनमें स्पष्ट उद्देश्य के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा तय करना और एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार के रूप में देखना शामिल था।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, दोनों नेताओं ने इस बात की पुष्टि की कि दोनों देशों को अपने संबंधों के प्रति रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने देना चाहिए। एमईए ने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर मोदी और शी ने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों सहित एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने तथा सार्थक और पूर्वानुमानित बाजार पहुंच को सुगम बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। एमईए ने कहा कि दोनों नेताओं ने दोनों पक्षों के राजनीतिक नजरिये और दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद के “न्यायसंगत, उचित और दोनों पक्षों को स्वीकार्य” समाधान के प्रति प्रतिबद्धता जताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि दोनों पक्षों को संबंधों में “तीन पारस्परिक बातों – पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हित” से निर्देशित होना चाहिए। पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध को लेकर चार साल से अधिक समय तक दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव रहा। गतिरोध खत्म होने के बाद अक्टूबर 2024 में रूस के कजान शहर में मोदी और शी के बीच मुलाकात हुई थी जिसके बाद भारत और चीन ने संबंध सुधारने की दिशा में कदम उठाने शुरू किए।
शनिवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए शी ने कहा कि ब्रिक्स सहयोग तंत्र उभरते बाजारों और विकासशील देशों के बीच सहयोग के लिए दुनिया का सबसे प्रभावशाली मंच बन गया है। उन्होंने समूह से पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने में अपनी “उचित भूमिका” निभाने का आह्वान किया। शी ने कहा कि इस वर्ष ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ है और पिछले दो दशकों में ब्रिक्स तंत्र लगातार बढ़ा और विस्तारित हुआ है तथा उसने उल्लेखनीय जीवंतता और गतिशीलता का प्रदर्शन किया है।
