मौसम में बदलाव के साथ ही सर्दी-जुकाम और बुखार के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलती है। कई बार लोग H1N1 (स्वाइन फ्लू) जैसे इन्फ्लूएंजा वायरस के संक्रमण को साधारण वायरल फीवर समझकर अनदेखा कर देते हैं। अहमदाबाद के नारायणा अस्पताल के कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. मनीष माहेश्वरी के अनुसार, H1N1 मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स से फैलता है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण सामान्य वायरल जैसे ही लगते हैं, इसलिए समय रहते इसके चेतावनी संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है।
H1N1 के लक्षणों को पहचानना
H1N1 के कई लक्षण हो सकते हैं, जिनमें से कई अन्य वायरल संक्रमणों जैसे ही होते हैं।
आम लक्षणों में शामिल हैं:
बुखार
खांसी
गले में खराश
शरीर में दर्द
सिरदर्द
ठंड लगना
थकान
कुछ मामलों में उल्टी या दस्त
ज़्यादातर स्वस्थ लोग सही देखभाल और पर्याप्त आराम से ठीक हो जाते हैं। फिर भी, ऐसे किसी भी लक्षण को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए जो ठीक न हो, और खराब हो जाए या बहुत गंभीर हो जाए।
कुछ ऐसे संकेत और लक्षण हैं जिनके लिए तुरंत मेडिकल देखभाल की ज़रूरत होती है। ऐसे संकेतों में सांस लेने में तकलीफ़, सीने में दर्द, लगातार बुखार, उलझन, बहुत ज़्यादा कमज़ोरी, होंठ या चेहरे का नीला पड़ना और खांसी का बढ़ना शामिल है।
किन्हें ज़्यादा खतरा है?
इन्फ़्लूएंज़ा किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ खास तरह के लोगों को जटिलताओं का खतरा ज़्यादा होता है।
वे हैं:
छोटे बच्चे
गर्भवती महिलाएं
अस्थमा से पीड़ित लोग
फेफड़ों की पुरानी बीमारी वाले लोग
डायबिटीज से पीड़ित लोग
दिल की बीमारी वाले लोग
कमज़ोर इम्यून सिस्टम वाले लोग
ऐसे मरीज़ों को निमोनिया जैसी जटिलताएं हो सकती हैं या फेफड़ों की पहले से मौजूद बीमारी या शरीर की कोई अन्य समस्या बढ़ सकती है।
ऐसे मरीज़ों के लिए डॉक्टर से जल्दी सलाह लेना फ़ायदेमंद हो सकता है।
जल्दी इलाज क्यों ज़रूरी है?
इन्फ़्लूएंज़ा के इलाज का एक अहम पहलू उन मरीज़ों की पहचान करना है जिन्हें दवा से फ़ायदा हो सकता है। डॉ. माहेश्वरी का कहना है कि एंटीवायरल दवाएं तब सबसे अच्छा काम करती हैं जब उन्हें उन मरीज़ों को जल्दी दिया जाए जिन्हें जटिलताओं का खतरा ज़्यादा होता है।
हालांकि, ये दवाएं डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेनी चाहिए। एक और ज़रूरी बात यह है कि खुद से एंटीबायोटिक्स न लें। H1N1 एक वायरस से होता है, और एंटीबायोटिक्स वायरल इन्फेक्शन का इलाज नहीं करती हैं। अगर सेकेंडरी बैक्टीरियल इन्फेक्शन का सबूत या पक्का शक हो, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स लिख सकते हैं।
बचाव ज़रूरी है
साधारण सावधानियां बरतकर इन्फ्लूएंजा को फैलने से रोका जा सकता है। जिन लोगों को सांस लेने में तकलीफ़ जैसे लक्षण हों, उन्हें जहां तक हो सके दूसरों से दूर रहना चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना, नियमित रूप से हाथ धोना और बीमार होने पर घर के अंदर रहना भी बीमारी को फैलने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
फ्लू का टीका लगवाना बीमारी से बचने का एक और बड़ा तरीका है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें गंभीर जटिलताओं का ज़्यादा ख़तरा है।
फ्लू का टीका लगवाने से इन्फेक्शन के प्रति पूरी तरह सुरक्षित नहीं हुआ जा सकता; हालांकि, इन्फेक्शन की जटिलताओं के कारण बीमार पड़ने के ख़तरे को कम किया जा सकता है।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
संदेश यह है कि घबराएं नहीं, लेकिन ऐसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ भी न करें जो बने रहते हैं या बिगड़ जाते हैं।
अगर फ्लू जैसी बीमारी से सांस लेने में तकलीफ़ हो, बहुत ज़्यादा कमज़ोरी महसूस हो, लगातार बुखार रहे या शुरुआत में सुधार के बाद हालत बिगड़ जाए, तो डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
सही जांच, इलाज और बचाव के उपायों से इन्फ्लूएंजा के ज़्यादातर मामलों को अच्छी तरह संभाला जा सकता है। हालांकि, चेतावनी वाले संकेतों को जल्दी पहचानना ज़रूरी है क्योंकि जो बीमारी शुरू में आम सांस की तकलीफ़ जैसी लगती है, वह कभी-कभी गंभीर हो सकती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
