भारत में स्टारबक्स एक बार फिर तेजी से स्टोर खोलने की रणनीति पर लौटने की तैयारी में है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लि. (टीसीपीएल) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुनील डिसूजा ने कहा कि पिछले डेढ़-दो साल में कंपनी ने अपने कारोबारी मॉडल को नए सिरे से तैयार करने पर ध्यान दिया है और अब कारोबार में सुधार के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। टाटा स्टारबक्स ने लगातार चार तिमाहियों में ‘समान स्टोर बिक्री’ में वृद्धि दर्ज की है।
डिसूजा के मुताबिक, बिक्री में अब तेजी भी देखने को मिल रही है। ऐसे में कंपनी दोबारा आक्रामक तरीके से स्टोर की संख्या बढ़ाएगी। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और अमेरिकी कंपनी स्टारबक्स कॉरपोरेशन के 50:50 अनुपात की संयुक्त उद्यम कंपनी टाटा स्टारबक्स इस समय भारत में करीब 500 स्टारबक्स कैफे संचालित करती है।
डिसूजा ने कहा कि कंपनी का ध्यान केवल नए शहरों में पहुंच बढ़ाने पर नहीं होगा, बल्कि मौजूदा शहरों में स्टोर की संख्या बढ़ाने पर भी रहेगा। स्टारबक्स फिलहाल करीब 80 शहरों में मौजूद है और कंपनी का मानना है कि यह संख्या पर्याप्त है। आगे विस्तार में शहरों के भीतर स्टोर की घनत्व बढ़ाने पर अधिक जोर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि किसी शहर में पांच से अधिक स्टोर होने पर व्यापक दक्षता मिलती है। इससे डिलिवरी और रसोई दक्षता से परिचालन करते हैं। पिछले करीब दो वर्षों के दौरान कंपनी ने स्टोर के आकार, प्रति स्टोर पूंजीगत खर्च और पेय पदार्थों की कीमतों समेत अपने पूरे कारोबारी मॉडल की समीक्षा की।
कंपनी ने इस अवधि का इस्तेमाल कारोबार को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए किया। जून तिमाही में टाटा स्टारबक्स का राजस्व 11 प्रतिशत बढ़ा। इस दौरान चार नए स्टोर खोले गए, जिनमें कोलकाता और नयी दिल्ली के दो रिजर्व स्टोर भी शामिल हैं।
इन स्टोरों से कंपनी के प्रीमियम पोर्टफोलियो को मजबूती मिली है। जून तिमाही के अंत तक कंपनी के भारत में 498 स्टारबक्स स्टोर थे। उन्होंने कहा कि टीसीपीएल के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने जून में कंपनी की सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए कहा था कि टाटा स्टारबक्स की दीर्घावधि की महत्वाकांक्षा चीन के स्तर पर पहुंचने की है।
चीन में कंपनी के करीब 8,000 स्टोर हैं। टीसीपीएल की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, बीते वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त उद्यम का राजस्व सात प्रतिशत बढ़कर 1,367 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का शुद्ध घाटा कम होकर 98.95 करोड़ रुपये रहा।
