2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में एक अहम फ़ैसले में, दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया। हालांकि, अदालत ने हुसैन के ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश का आरोप हटा दिया। यह फ़ैसला कड़कड़डूमा अदालत ने उस मामले में सुनाया, जिस पर सबकी नज़रें टिकी थीं। यह मामला फ़रवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा था।
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ताहिर के अलावा, इस मामले में चार और लोगों को दोषी ठहराया गया है, जिनमें नाज़िम, क़ासिम, अनस और जावेद शामिल हैं। हालांकि, अदालत ने पर्याप्त सबूत न होने के कारण मामले के छह अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। बाद में उनका शव पास के ही एक नाले से बरामद किया गया, जिससे पूरे देश में भारी आक्रोश फैल गया। यह मामला शर्मा के पिता की शिकायत पर दयालपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। इस मामले में ताहिर हुसैन के अलावा 10 अन्य आरोपियों को भी नामजद किया गया था।
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दिल्ली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ़ भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की, जिनमें धारा 109 (उकसाना), 114, 147 (दंगा करना), 148 (घातक हथियार के साथ दंगा करना), 149 (गैर-कानूनी जमावड़ा), 436 (आग से नुकसान पहुंचाना), 153A (दुश्मनी को बढ़ावा देना), 505 (सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान), 365 (अपहरण), 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाना), 120B (आपराधिक साजिश) और 34 (साझा इरादा) शामिल हैं। हालांकि अदालत ने ताहिर हुसैन को हत्या के मामले में दोषी ठहराया, लेकिन आपराधिक साजिश से जुड़ी धारा 120B के आरोप से उन्हें बरी कर दिया। आगे की कार्यवाही के बाद सज़ा सुनाए जाने की उम्मीद है।
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