अधिकारियों ने बताया कि देहरादून स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने हरिद्वार में 2003 में हुए 55 लाख रुपये के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) धोखाधड़ी मामले में आठ अधिकारियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। सीबीआई की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, “सीबीआई न्यायालय देहरादून ने 20 मार्च, 2026 को पीडब्ल्यूडी धोखाधड़ी मामले में दीपक कुमार वर्मा (एलडीसी), मदन पाल (मेट), मणि राम (बेलदार), सुरेंद्र कुमार कौशिक (ड्राइवर), कासिम (सेवानिवृत्त बेलदार), पीडब्ल्यूडी हरिद्वार, सुखपाल सिंह (यूडीसी), चतर सिंह (रोलर ड्राइवर) और पालू दास (सहायक कोषाधिकारी, कोषागार हरिद्वार) को दो साल के कठोर कारावास और कुल 2.85 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
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सीबीआई ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 7 मई, 2003 के आदेश पर 9 अगस्त, 2003 को इस मामले को दर्ज किया था। यह आदेश सिविल रिट याचिका के संबंध में पारित किया गया था जिसमें जांच को केंद्रीय एजेंसी को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था। आरोप था कि वर्ष 2001-2002 के दौरान, हरिद्वार लोक निर्माण विभाग के कुछ अधिकारियों ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत करके जाली और अनाधिकृत विभागीय चेक जारी और भुनाकर सरकारी धन की धोखाधड़ी से 55,10,511 रुपये की राशि निकाल ली।
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जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 15 जून, 2005 को 12 सरकारी कर्मचारियों और 8 निजी व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान, 4 आरोपी, अर्थात् रविंद्र श्रीवास्तव, सुखचंद त्यागी, धर्मेंद्र कुमार भटनागर और इलमचान की मृत्यु हो गई, और उनके खिलाफ मुकदमा समाप्त कर दिया गया। इसके अलावा, 7 आरोपी, अर्थात् रेखा नेगी, पूनम वर्मा, प्रतिभा, संजय कुमार, चंद्रावती, राजपाल और रीना श्रीवास्तव ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और उन्हें पहले ही निचली अदालत द्वारा अलग-अलग दोषी ठहराया जा चुका है।
