निर्वाचन आयोग ने बृहस्पतिवार को 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) का आदेश दिया। साथ ही आयोग ने पहली बार यह निर्देश दिया है कि राजनीतिक दलों को “पढ़ने योग्य पीडीएफ प्रारूप” में मतदाता सूचियां उपलब्ध कराई जाएं। जिन राज्यों में एसएसआर कराया जाएगा, उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर शामिल हैं।
इन राज्यों में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अंतिम मतदाता सूची चार जनवरी को प्रकाशित की जाएगी। निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, निर्वाचन कानून के तहत एसएसआर एक अनिवार्य वार्षिक प्रक्रिया है।
यह प्रक्रिया खास तौर पर उन राज्यों में की जाती है, जहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। मशीन द्वारा पढ़े जाने योग्य मतदाता सूची की उपलब्धता विपक्षी दलों की एक प्रमुख मांग रही है। हालांकि, आंकड़ों में हेरफेर की आशंकाओं और अदालती आदेशों का हवाला देते हुए निर्वाचन आयोग (ईसी) ने फिलहाल के लिए इस मांग को खारिज कर दिया है।
एक अहम बदलाव के तहत, ईसी राजनीतिक दलों को मतदाता सूचियों की सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराएगा। अब मसौदा और अंतिम मतदाता सूचियां (बिना फोटो के) इमेज पीडीएफ के बजाय पढ़ने योग्य पीडीएफ प्रारूप में दी जाएंगी। इन 17 राज्यों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पूरा हो चुका है।
वहीं, असम में कानूनी कारणों से एसआईआर के बजाय विशेष पुनरीक्षण कराया गया। मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं, खासकर युवाओं और पहली बार मतदान करने वालों के नाम मतदाता सूची में शामिल करना, इसकी प्रविष्टियों में सुधार करना और इसमें संशोधन को और बेहतर बनाना है। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसएसआर कराया जाएगा, उनमें अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
