श्रीलंका में सैकड़ों बौद्ध भिक्षुओं ने धार्मिक नेता गालागोडाते ज्ञानसारा की रिहाई की मांग करते हुए बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति सचिवालय के द्वार तक मार्च निकाला। ज्ञानसारा अदालत की अवमानना के मामले में जेल की सजा काट रहे हैं। ज्ञानसारा 2012 से बोडू बाला सेना (बौद्ध शक्ति बल) का नेतृत्व कर रहे हैं और बौद्ध राष्ट्रवादी अभियान में सबसे आगे रहे हैं।
इस अभियान की श्रीलंका के अल्पसंख्यक मुस्लिमों के प्रति बयानबाजी को लेकर आलोचना होती रही है। उच्चतम न्यायालय ने 2019 में राष्ट्रपति द्वारा ज्ञानसारा को दी गई माफी रद्द कर दी थी और उन्हें एक लापता पत्रकार की पत्नी को डराने-धमकाने के मामले में छह साल की जेल की सजा का शेष हिस्सा काटने का आदेश दिया था। इसके बाद उन्हें पिछले सप्ताह फिर जेल भेज दिया गया।
भिक्षुओं ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति सचिवालय पहुंचकर अपना छह दिवसीय विरोध मार्च पूरा किया। यह मार्च कैंडी स्थित टेंपल ऑफ द टूथ से शुरू हुआ था। प्रदर्शन कर रहे भिक्षु उलपाने सुमंगला ने कहा, हमने राष्ट्रपति के सचिव से हमारे पास आकर बात सुनने को कहा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
भिक्षुओं ने ज्ञानसारा की रिहाई और उन्हें भिक्षु के वस्त्र पहनकर अदालत में पेश होने की अनुमति देने की मांग की। इस महीने की शुरुआत में, उन्हें आम लोगों वाले कपड़े पहनाकर अदालत लाए जाने के बाद भिक्षुओं ने विरोध प्रदर्शन किया। ज्ञानसारा ने 2016 में एक पत्रकार के अपहरण से जुड़े मामले की सुनवाई में बाधा डाली थी।
यह पत्रकार 2010 में लापता हो गया था। इस मामले में सैन्य खुफिया अधिकारियों पर आरोप लगाए गए थे। ज्ञानसारा को 2018 में अदालत की अवमानना करने और लापता पत्रकार की पत्नी को डराने-धमकाने के मामले में सजा सुनाई गई थी।
हालांकि, तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने 2019 में उन्हें माफी दे दी थी, जिसके कारण ज्ञानसारा एक साल से भी कम समय तक जेल में रहे थे।
