माना जा रहा है कि साल 2030 तक देश के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में करीब 10 लाख नए रोजगार मिलेंगे। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एवं वॉटर, नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल और स्किल काउंसिल फॉर ग्रीन जॉब्स द्वारा किए गए अध्ययन में यह सामने आया है। ऐसे में रोजगार के रूप में मुख्य रूप से रूफटॉप सोलर और मिनी-माइक्रो ग्रिड सिस्टम जैसे छोटे रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स सामने आएंगे। बता दें कि फिलहाल इस फील्ड में करीब 1.1 लाख लोग काम कर रहे हैं।
सोलर इंजीनियर्स के काम
सोलर इंजीनियर्स का काम सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन की तकनीक पर काम करना होता है। यह लोग सोलर एनर्जी से संबंधित प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग, एग्जीक्यूशन से लेकर डिजाइनिंग तक का काम देखते हैं। सोलर इंजीनियर्स की देखरेख में ही रूफटॉप सोलर पैनल्स का इंस्टॉलेशन होता है। कमर्शियल सोलर एनर्जी प्लांट, रेजिडेंशियल या सोलर पावर सिस्टम विकसित करने में भी सोलर इंजीनियर्स की मदद ली जाती है।
इसे भी पढ़ें: CRPF Recruitment: CRPF ने Head Constable और GD Constable के 521 पदों पर मांगे आवेदन, ऐसे करें अप्लाई
क्वालिफिकेशन
आमतौर पर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने वाले स्टूडेंट्स ही सोलर एनर्जी सेक्टर में काम करते हैं। इसके अलावा केमिकल इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स भी इस फील्ड में अपना कॅरियर बना सकते हैं। वहीं NIT और IIT जैसे संस्थानों में JEE के जरिए इन कोर्सेज में एडमिशन मिलता है। साइंस विषय से 12वीं पास करने के बाद छात्र यह कोर्स कर सकते हैं।
प्रमुख संस्थान
आईआईटी दिल्ली
आईआईटी बॉम्बे
आईआईटी गुवाहाटी
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी, ठाणे
सभी के लिए संभावनाएं
सोलर एनर्जी के फील्ड में प्रोजेक्ट मैनेजर्स, इंजीनियर्स, सेल्स प्रोफेशनल्स और बिजनेस डेवलपमेंट एक्सपर्ट्स को बड़ी कंपनियां फौरन नौकरी का ऑफिर देती हैं। वहीं छतों पर सोलर पैनल लगाने, उनकी साफ-सफाई करने और देखरेख करने जैसे कार्यों के लिए ट्रेड और गैर कुशल दोनों ही तरह के लोगों को काम मिल जाता है। वहीं इन कामों के लिए कंपनियां खुद भी उम्मीदवारों को ट्रेनिंग देती हैं। सरकार द्वारा चलाए जाने वाले ‘सूर्य मित्र कौशल विकास कार्यक्रम’ के तहत भी ट्रेनिंग दी जाती है। इसके साथ ही सोलर कुकिंग थर्मल के फील्ड में भी कॅरियर के बेहतरीन मौके हैं।
