देहरादून, सात अक्टूबर उत्तराखंड के चमोली में मंगलवार रात दर्ज किए गए भूकंप के बाद राज्य सरकार ने लोगों को जागरूक करने और भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली की नियमित जांच के लिए अब हर माह की नौ तारीख को सुबह 11 बजे भूकंप का सायरन बजाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने आपदा प्रबंधन विभाग को इस संबंध में आवश्यक निर्देश देते हुए देर शाम आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के साथ बैठक कर इसे प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में पूर्व तैयारी और समय रहते चेतावनी प्राप्त करना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने सायरन और सेंसर की नियमित जांच के साथ जरूरत के अनुसार नए उपकरण स्थापित करने के भी निर्देश दिए। सुमन ने बताया कि वर्तमान में राज्य में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित हैं जबकि उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) और भारतीय प्राद्यौगिकी संस्थान रुड़की के सहयोग से और सेंसर स्थापित करने का प्रस्ताव भी गतिमान है।
उन्होंने बताया कि मंगलवार की रात चमोली जिले के थराली के निकट आए 4.9 तीव्रता के भूकंप के दौरान भी पूर्व चेतावनी प्रणाली ने काम किया। उन्होंने भूदेव मोबाइल ऐप और स्थापित सायरनों के माध्यम से भूकंपीय तरंगों के आम लोगों तक पहुंचने से पहले चेतावनी प्राप्त हुई। हर माह होने वाले सायरन परीक्षण का जिक्र करते हुए सचिव ने कहा कि इसका उद्देश्य लोगों को इसकी आवाज से परिचित कराना भी है, ताकि वास्तविक भूकंप के समय चेतावनी मिलने पर वे इसे पहचान सकें और घबराने के बजाय तत्काल सुरक्षित कदम उठा सकें।
उन्होंने लोगों से भूदेव और सचेत ऐप के अपडेटेड संस्करण मोबाइल में रखने तथा उनमें लोकेशन की अनुमति देने की अपील भी की और कहा कि नौ तारीख को सायरन बजने पर लोग घबराएं नहीं और इसे प्रणाली के नियमित परीक्षण के रूप में समझें।
