विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में मानव संसाधन विकास की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण और कौशल विकास ही ‘साउथ-साउथ सहयोग’ (विकासशील देशों के बीच आपसी सहयोग) की मुख्य नींव हैं। उन्होंने घाना में इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन’ (ITEC) प्रोग्राम के पूर्व छात्रों के साथ बातचीत के दौरान ये बातें कहीं। इस बातचीत के दौरान, जयशंकर ने मज़बूत द्विपक्षीय संबंध बनाने में भारत की प्रमुख क्षमता-निर्माण पहल के लंबे समय तक रहने वाले असर का ज़िक्र किया। जयशंकर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि घाना में ITEC प्रोग्राम के पूर्व छात्रों के साथ बातचीत करके खुशी हुई। उन्होंने कहा कि क्षमता विकास और कौशल को बेहतर बनाना [हमारी विकास साझेदारी] और ‘साउथ-साउथ सहयोग’ का एक अहम हिस्सा है।
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यह बातचीत ‘ग्लोबल साउथ’ के सहयोगी देशों के साथ विशेषज्ञता, तकनीकी जानकारी और संस्थागत क्षमताएं साझा करने के प्रति भारत की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाती है। ITEC प्रोग्राम के ज़रिए, अफ्रीका और अन्य जगहों के हज़ारों पेशेवरों ने अलग-अलग क्षेत्रों में विशेष ट्रेनिंग ली है, जिससे आपसी विकास और एकजुटता पर आधारित विकास साझेदारियां मज़बूत हुई हैं। इससे पहले दिन में जयशंकर ने घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुद्ज़ेटो अब्लाक्वा से मुलाक़ात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी को बढ़ाने के लिए ज़रूरी रणनीतियों पर चर्चा की। ‘ग्लोबल साउथ’ के साझेदार के तौर पर विकास के साझा लक्ष्यों और ऐतिहासिक एकजुटता पर ज़ोर देते हुए, दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, विकास सहायता, फ़ार्मास्यूटिकल्स, क्षमता निर्माण, रक्षा और टेक्नोलॉजी जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। विदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया घाना के विदेश मंत्री @S_OkudzetoAblak के साथ व्यापक चर्चा हुई। ‘ग्लोबल साउथ’ के साझेदार के तौर पर, भारत और घाना दोनों की विकास संबंधी आकांक्षाएं और ऐतिहासिक एकजुटता एक जैसी है। व्यापार, निवेश, विकास, फ़ार्मास्यूटिकल्स, क्षमता निर्माण, रक्षा, टेक्नोलॉजी और लोगों के बीच आपसी संबंधों के क्षेत्रों में हमारी व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। साथ ही, बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने और अफ़्रीकी यूनियन तथा ECOWAS के साथ भारत के जुड़ाव को और मज़बूत करने पर भी बात हुई।” विदेश मंत्री जयशंकर मंगलवार को अकरा पहुँचे, क्योंकि नई दिल्ली दोनों राजधानियों के बीच संबंधों को और मज़बूत करने के लिए सार्थक बातचीत करना चाहती है।
