नेशनल कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 3 नवंबर को बारामती दौरे से पहले उनकी पार्टी का ध्यान महाराष्ट्र में सूखे से प्रभावित लोगों की मदद करने पर है। पत्रकारों से बात करते हुए पवार ने कहा कि पीएम मोदी 3 नवंबर को बारामती का दौरा करेंगे। अभी हमारा पूरा ध्यान सूखे से प्रभावित लोगों की मदद करने पर है। महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में सूखे की स्थिति को लेकर चिंता और पानी व बारिश की कमी से प्रभावित किसानों, खेतिहर मजदूरों और अन्य लोगों के लिए तुरंत राहत उपायों की मांग के बीच पवार का यह बयान आया है।
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इससे पहले 28 सितंबर को, NCP-SP विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को गंभीर बताया था और दावा किया था कि यह 1972 के सूखे से भी बदतर है। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए तुरंत मदद की घोषणा करने की अपील की थी। रोहित पवार ने सूखे से प्रभावित किसानों के लिए कर्ज वसूली रोकने और कर्ज पूरी तरह माफ करने की भी मांग की थी। उन्होंने यह भी मांग की थी कि अगर कोई रियायत नहीं दी जाती है, तो किसानों के बिजली बिल पूरी तरह माफ किए जाएं और साथ ही सूखे से प्रभावित इलाकों में छात्रों की स्कूल फीस भी माफ की जाए।
उन्होंने गाय, बैल, भेड़ और बकरी जैसे पशु पालने वाले किसानों के लिए सीधी आर्थिक मदद की भी मांग की थी। सरकार की सूखा-राहत नीति पर सवाल उठाते हुए, रोहित पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन के अलग-अलग बयानों का ज़िक्र किया था। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि हम तुरंत मदद करेंगे, लेकिन मंत्री गिरीश महाजन कहते हैं कि हम नीति के अनुसार मदद करेंगे। तो असल में नीति क्या है?
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रोहित पवार के बताए आंकड़ों के अनुसार, 27 सितंबर तक महाराष्ट्र में कुल बारिश में 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि जून में बारिश सामान्य से 40 प्रतिशत कम थी, जबकि जुलाई में 110 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई। अगस्त में 51 प्रतिशत की कमी रही और उसके बाद सितंबर में 49 प्रतिशत की कमी देखी गई।
