इंदौर, दो अक्टूबर मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर की दूषित पेयजल त्रासदी की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद शुक्रवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला बोला और कहा कि इस बड़े शहर में पेयजल की स्थिति अफ्रीका के छोटे-छोटे गांवों की तरह है। उन्होंने शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल आपूर्ति से कई नागरिकों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के इस्तीफे की मांग भी की। सिंघार ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘पेयजल त्रासदी की बड़ी जांच रिपोर्ट तो बनी, लेकिन स्थिति आज भी ‘खोदा पहाड़, निकली चुहिया’ की कहावत जैसी है क्योंकि रिपोर्ट सामने आने के बाद भी प्रदेश सरकार ने जिम्मेदार लोगों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।’’
उन्होंने मांग की कि आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव को तत्काल जरूरी कदम उठाना चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।
सिंघार ने दावा किया कि पेयजल त्रासदी को महीनों गुजर जाने के बाद भी शहर के नागरिक और सरकारी अस्पतालों के मरीज अब भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं और प्रदेश सरकार विधानसभा में दिए गए तमाम आश्वासनों के बावजूद लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा, ‘‘इंदौर नगर निगम का सालाना बजट 8,500 करोड़ रुपये का है। इसके बावजूद इंदौर जैसे बड़े शहर में पेयजल की स्थिति अफ्रीका के छोटे-छोटे गांवों की तरह है।’’
विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि सूबे में सत्तारूढ़ भाजपा कभी नहीं चाहती थी कि भागीरथपुरा के दूषित पेयजल मामले में गठित न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने काबीना मंत्री व स्थानीय विधायक कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव और क्षेत्रीय पार्षद कमल बाघेला को बचाने के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाले एक सदस्यीय आयोग के सामने असहयोग व हेर-फेर किया। सिंघार ने कहा कि आयोग के मांगे जाने पर भी उसे पेयजल और सीवरेज की पाइपलाइन के दस्तावेज मुहैया नहीं कराए गए। उन्होंने रिपोर्ट के हवाले से कहा कि भागीरथपुरा में पाइपलाइन की एक परियोजना में निविदा बुलाने से लेकर काम पूरा होने तक की प्रक्रिया में कुल 859 दिन तक की देरी हुई, जिसमें 66 दिन का विलंब महज इसलिए हुआ कि महापौर भार्गव ने फाइल पर दस्तखत नहीं किए थे।
सिंघार ने महापौर के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा, ‘‘भार्गव को जनता को बताना चाहिए कि यह फाइल 66 दिन क्यों रुकी रही? क्या जिस ठेकेदार फर्म को पाइपलाइन बिछाने का ठेका मिला था, उससे कमीशन के लेन-देन के लिए फाइल रोक कर रखी गई?’’
न्यायिक आयोग की 600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि भागीरथपुरा में सीवेज और पेयजल की पाइपलाइन को नियमों व मानकों के खिलाफ पास-पास बिछाए जाने से सीवेज का गंदा पानी पेयजल में मिल गया था। रिपोर्ट के मुताबिक दूषित पेयजल में ‘ई. कोलाई’ और ‘टोटल कोलीफॉर्म’ जैसे बैक्टीरिया पाए गए और यह पानी पीने से लोगों में ‘गैस्ट्रोएंटेराइटिस’, उल्टी-दस्त और ‘डिहाइड्रेशन’ जैसी बीमारियां फैलीं।
भागीरथपुरा में दूषित पेयजल की आपूर्ति से लोगों के बीमार होने का मामला दिसंबर 2025 में सामने आया था। स्थानीय लोगों और कांग्रेस ने दावा किया है कि इस प्रकोप में 36 लोगों की जान गई। न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि स्वास्थ्य विभाग को 12 फरवरी तक भागीरथपुरा में 35 लोगों की मौत की जानकारी मिली थी और इनमें से 22 मौतों को दूषित पेयजल आपूर्ति की घटना से ‘संभवतः संबंधित’ माना गया है।
