दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी ने भारतीय सिनेमा में अपने सफर के 60 गौरवशाली साल पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने खुद को बेहद धन्य और गौरवान्वित बताया है। हेमा मालिनी ने अपनी इस बेमिसाल यात्रा की सफलता का श्रेय फिल्म निर्माताओं, सह-कलाकारों, तकनीशियनों और अपने परिवार से मिले अटूट सहयोग और प्यार को दिया है।
इस खास पड़ाव का जश्न मनाने के लिए मुंबई के षण्मुखानंद हॉल में शुक्रवार की शाम एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका नाम हेमा मालिनी – लाइव इन कॉन्सर्ट: सेलिब्रेटिंग द ड्रीम गर्ल्स डायमंड जुबली – 60 ग्लोरियस इयर्स इन सिनेमा था। इस समारोह में 15 सदस्यों वाले एक लाइव ऑर्केस्ट्रा ने उनके फिल्मी सफर के कई यादगार और सदाबहार गानों को शानदार धुनों के माध्यम से पेश किया। शोले, सीता और गीता, सत्ते पे सत्ता, खुशबू, नसीब और बागबान जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में अपनी अदाकारी का जादू बिखेरने वाली ड्रीम गर्ल ने दशकों से मिल रहे दर्शकों के अपार प्यार के प्रति आभार व्यक्त किया।
अपनी सफलता के पीछे के मजबूत स्तंभों को याद करते हुए हेमा मालिनी ने कहा कि वह अपनी मां की बेहद आभारी हैं, जिन्होंने हमेशा उनका साथ दिया। उनका मानना है कि बच्चों के जीवन और करियर को संवारने में मां की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसके साथ ही उन्होंने अपने पूरे परिवार की सराहना की, जो हमेशा उनके साथ मजबूती से खड़ा रहा। करीब 200 फिल्मों में काम कर चुकीं हेमा मालिनी ने कहा कि वह इस बेहद खूबसूरत और विशाल फिल्म उद्योग का हिस्सा बनकर खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं, जिसने अनगिनत सितारों को जन्म दिया है।
छह दशक लंबे अभिनय सफर के अलावा हेमा मालिनी ने दो फिल्मों का निर्देशन भी किया है, जिनमें 1992 में आई शाहरुख खान अभिनीत फिल्म दिल आशना है और 2011 में उनकी बेटी ईशा देओल अभिनीत टेल मी ओ खुदा शामिल हैं। फिल्म इंडस्ट्री के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह उद्योग बहुत बड़ा और खूबसूरत है, जो हर प्रतिभावान और समर्पित व्यक्ति को सफलता के ऊंचे मुकाम पर पहुंचने का अवसर देता है। इसके अलावा उन्होंने पर्दे के पीछे काम करने वाले तकनीशियनों जैसे कॉस्ट्यूम डिजाइनर, मेकअप आर्टिस्ट और कैमरामैन के अमूल्य योगदान की भी सराहना की।
जब कार्यक्रम के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या दीपिका पादुकोण उनकी बायोपिक में मुख्य भूमिका निभा सकती हैं, तो उन्होंने तुरंत अपनी सहमति देते हुए कहा कि दीपिका बेहद खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं और वह या कोई भी अन्य कलाकार इस भूमिका को निभा सकता है।
इस संगीतमय शाम को यादगार बनाने के लिए सुदेश भोंसले, सुरेश वाडकर, पद्मिनी कोल्हापुरी, शब्बीर कुमार, अनु मलिक, अनूप जलोटा, कविता कृष्णमूर्ति, विजेता पंडित और पूर्णिमा श्रेष्ठा जैसे दिग्गजों ने मंच पर हेमा मालिनी के सदाबहार गीतों जैसे मेरी मखना मेरी सोनिये, होरी खेले रघुवीरा और एक न एक दिन ये कहानी बनेगी की जादुई प्रस्तुतियां दीं। हेमा मालिनी ने सभी गायकों का आभार जताया और कहा कि 1970 और 80 के दशक के गानों और फिल्मों का आकर्षण आज भी पूरी दुनिया में बरकरार है।
इस जश्न में शामिल होने के लिए फिल्म जगत के कई जाने-माने सितारे और हेमा मालिनी के पुराने दोस्त पहुंचे, जिनमें रमेश सिप्पी, राकेश रोशन, शत्रुघ्न सिन्हा, जितेंद्र, मधु, पूनम ढिल्लों, किरण जुनेजा, बाबुल सुप्रियो और संजीव गुप्ता प्रमुख रहे। हेमा मालिनी ने अपने सह-कलाकारों को धन्यवाद दिया, हालांकि उन्होंने यह भी साझा किया कि उनकी बड़ी बेटी ईशा देओल वायरल इंफेक्शन के कारण इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकीं।
इस मौके पर निर्देशक रमेश सिप्पी ने उनके साथ बिताए पुराने दिनों को याद किया और उनकी कमाल की याददाश्त व संवाद अदायगी की तारीफ की। उन्होंने बताया कि सीता और गीता के समय हेमा तुरंत दोहरी भूमिका के लिए तैयार हो गई थीं और आज शोले के 50 साल बाद भी लोग उन्हें बसंती के रूप में याद करते हैं। वहीं, अभिनेत्री मधु ने विपरीत परिस्थितियों में भी हेमा के शांत स्वभाव की तारीफ की, जबकि पूनम ढिल्लों ने उन्हें फिल्म जगत का गौरव बताते हुए एक शानदार अभिनेत्री और राजनेता के रूप में उनके योगदान को सराहा। पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने भी अपने पुराने दिल्ली के दिनों की यादें साझा कीं और बताया कि किस तरह हेमा मालिनी आज भी उनके परिवार के लिए वैसी ही हैं जैसी पहले थीं।
