पटना, पांच अक्टूबर बिहार में गंडक नदी का जलस्तर तेजी से घटने के बीच, राज्य सरकार ने हालिया बाढ़ से निपटने में कथित लापरवाही बरतने को लेकर रविवार को सात इंजीनियर को निलंबित कर दिया और एक अन्य अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। रविवार शाम जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) की ओर से जारी बयान के अनुसार सारण के रेवा घाट में गंडक नदी का जलस्तर अपने रिकॉर्ड स्तर से 177 सेंटीमीटर नीचे आ गया है और अब खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर नीचे है।
बयान में कहा गया कि वैशाली के लालगंज में जलस्तर 130 सेंटीमीटर घटा है, लेकिन अभी भी खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर ऊपर है। बयान के अनुसार, अगले 24 घंटे में इसके खतरे के निशान से नीचे आने की उम्मीद है। नेपाल और उत्तर प्रदेश के आसपास के इलाकों में भारी बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर अभूतपूर्व रूप से बढ़ गया था।
नेपाल के देवघाट और बिहार के बगहा, डुमरियाघाट, रेवा घाट तथा लालगंज में रिकॉर्ड जलस्तर दर्ज किया गया था। विभाग ने कहा कि निरीक्षण के दौरान कुछ इंजीनियरों की ओर से आपात स्थिति में कार्रवाई करने में लापरवाही और देरी की बात सामने आई। इसमें पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों और सामग्री की व्यवस्था न करना तथा स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ खराब समन्वय शामिल है।
बयान में कहा गया, “दो कार्यपालक इंजीनियरों समेत सात इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। चंपारण तटबंध को हुए नुकसान के बाद कथित लापरवाही के आरोप में मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता कुमार मनोज गुप्ता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का भी आदेश दिया गया है।”
निलंबित अधिकारियों में सारण के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर, गोपालगंज के कार्यपालक अभियंता मोहम्मद साजिद इकबाल, सारण के सहायक अभियंता सुनील कुमार और विनोद कुमार, गोपालगंज के सहायक अभियंता मोहम्मद जावेद अंसारी तथा सारण और गोपालगंज के कनिष्ठ अभियंता क्रमशः चंद्रशेखर कुमार और विकास कुमार शामिल हैं।
