नयी दिल्ली, चार अक्टूबर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद बुधवार को कारोबारियों के लिए कर अनुपालन को आसान बनाने के लिए व्यापक प्रक्रियागत सुधारों पर विचार कर सकती है। इनमें छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को जीएसटी पंजीकरण के लिए मंच के गोदामों का उपयोग करने की अनुमति देना, वास्तविक खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की रक्षा करना और कम मूल्य के मुकदमों को घटाना शामिल है। जीएसटी 2.0 प्रक्रिया सुधारों के तहत ये प्रस्ताव पंजीकरण और रिटर्न दाखिल करने को सरल बनाने, माल की आवाजाही को अधिक सुगम बनाने तथा करदाताओं और कर विभाग के बीच विवादों को कम करने पर केंद्रित हैं।
इन प्रस्तावों में एक छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को उन राज्यों में मंच के गोदाम को अपने पंजीकृत व्यावसायिक स्थल के रूप में दर्शाने की अनुमति देने से संबंधित है, जहां उनका अपना कोई परिसर नहीं है। इसके तहत विक्रेता की किसी एक राज्य में वास्तविक उपस्थिति आवश्यक होगी, जहां भौतिक सत्यापन और आधार प्रमाणीकरण पूरा किया जाएगा। इसके बाद अन्य राज्यों में पंजीकरण ई-कॉमर्स मंच की सहमति से बिना किसी कर अधिकारी के अतिरिक्त दखल के मिल सकेगी।
सूत्रों ने कहा कि इस कदम से करीब 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को हर उस राज्य में भौतिक कार्यालय स्थापित किए बिना राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सकेगी जहां उनका माल रखा जाता है। साथ ही, इससे प्रतिस्पर्धी ई-कॉमर्स कारोबारी मॉडलों में अधिक कर समानता भी आएगी। परिषद वास्तविक खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की रक्षा करने के प्रस्ताव पर भी विचार कर सकती है, जिनके पास वैध बिल हैं, भले ही किसी आपूर्ति शृंखला के पिछले विक्रेता ने कर भुगतान में चूक की हो।
ऐसे मामलों में वसूली की कार्रवाई खरीदार के बजाय चूक करने वाले विक्रेता के खिलाफ की जाएगी। यह प्रस्ताव जीएसटी मुकदमों और कारोबारी अनिश्चितता के एक बड़े कारण को दूर कर सकता है, विशेषकर उन कंपनियों के लिए जो छोटे और नए विक्रेताओं से खरीदारी करती हैं। मुकदमों और प्रशासनिक बोझ को कम करने के लिए परिषद 10,000 रुपये से कम की कर मांग वाले मामलों में जीएसटी नोटिस जारी करने पर रोक लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है।
प्रस्ताव के अनुसार ऐसे मामले संख्या के लिहाज से कुल मामलों का लगभग 20 प्रतिशत हैं, लेकिन इनमें कर की राशि बेहद कम होती है। यह सीमा लंबित मामलों पर भी लागू हो सकती है, चाहे वे निर्धारण के स्तर पर हों या अपील के चरण में। इसी तरह 10,000 रुपये से अधिक की मांग वाले मामलों में औपचारिक नोटिस जारी करने से पहले कर अधिकारियों को करदाता को एक सूचना भेजनी होगी और जवाब देने का अवसर देना होगा।
परिषद कर मांग उठाने और उस पर निर्णय लेने के लिए साझा मानकों पर भी विचार कर सकती है, जिसमें नोटिस तैयार करने और तामील करने, सामान्य कम भुगतान से धोखाधड़ी को अलग करने, सुनवाई करने और तर्कसंगत आदेश जारी करने के विस्तृत दिशानिर्देश शामिल हैं। प्रस्ताव के तहत जब कोई करदाता मुकदमा लड़ने के बजाय विवाद निपटाने का विकल्प चुनता है, तो भुगतान की गई राशि को जुर्माने के बजाय प्रभार कहा जाएगा। जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को भी नए सिरे से तैयार किया जा रहा है ताकि आवेदन पहली बार में ही सही तरीके से पूरे हो सकें।
प्रस्तावित प्रणाली प्रत्येक चरण में मार्गदर्शन देगी, आवेदकों को केवल वही खंड दिखाएगी जो उनके लिए प्रासंगिक हैं और अपलोड करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की उपयुक्त सूची उपलब्ध कराएगी। कई राज्यों में पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाले कारोबारी उन्हें एक साथ पूरा कर सकेंगे। यह प्रणाली कारोबार के स्थान के आधार पर संबंधित कर कार्यालय का निर्धारण भी करेगी।
एक अन्य प्रस्ताव में खुफिया सूचना आधारित लॉजिस्टिक और पारगमन जांच शुरू करने की बात कही गई है। इसके तहत मालवाहक वाहनों को किसी वरिष्ठ अधिकारी की पूर्व अनुमति से ही रोका जा सकेगा, और आमतौर पर यह जांच केवल वही राज्य कर सकेगा जहां से माल चला है। दस्तावेज गायब होने या खरीदार द्वारा कर देय होने की स्थिति में इसके अपवाद लागू होंगे।
प्रस्तावित प्रणाली का मकसद राज्य की सीमाओं को पार करने वाले वाहनों के बार-बार रोके जाने को कम करना, पारगमन समय तथा माल ढुलाई लागत को घटाना और घरेलू तथा निर्यात माल की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित बनाना है। एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध भागीदार रजत मोहन ने कहा कि ये प्रस्ताव उन कई ढांचागत चिंताओं का समाधान करते हैं जिन्हें जीएसटी लागू होने के बाद से व्यवसायों और कर पेशेवरों ने रेखांकित किया है।
