नयी दिल्ली, एक सितंबर दिल्ली सरकार ने दिल्ली सौर ऊर्जा नीति -2023 (दूसरा संशोधन) के तहत औसतन 400 यूनिट बिजली की खपत करने वाले 2.30 लाख उपभोक्ताओं के घरों की छतों पर मुफ्त में सौर पैनल लगाने का फैसला किया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को यहां पत्रकारों को बताया कि मंत्रिमंडल की बैठक में घरों की छतों पर तीन किलोवाट के सौर पैनल लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है जिसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि योजना के पूरी तरह लागू होने के बाद दिल्ली में सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन मौजूदा करीब 228 मेगावाट से बढ़कर 500 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है और इस तरह राष्ट्रीय राजधानी के निवासी सिर्फ बिजली उपभोक्ता नहीं रह जाएंगे बल्कि बिजली पैदा करने वाले बनेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सौर प्रणाली लगवाने के लिए उपभोक्ताओं को अग्रिम राशि का भुगतान करना पड़ता था, जबकि प्रोत्साहन राशि बाद के वर्षों में मिलती थी, लेकिन नयी नीति में इस व्यवस्था को बदलते हुए शुरुआत में ही वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी गई है। गुप्ता ने बताया कि नयी व्यवस्था के तहत 400 यूनिट तक की औसत मासिक बिजली खपत वाले पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को, सौर ऊर्जा प्रणाली की स्थापना की तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर, तीन किलोवाट तक का सौर पैनल बिना किसी अग्रिम लागत के उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के तहत मिलने वाली 78,000 रुपये की सब्सिडी के साथ दिल्ली सरकार भी 78,000 रुपये की पूंजीगत सब्सिडी देगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर पैनल की लागत और सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी के बीच जो अंतर आएगा वह दिल्ली सरकार अपनी तरफ से अतिरिक्त पैसा देकर पूरा करेगी। उन्होंने बताया कि इन पैनलों से अतिरिक्त बिजली सरकार को देने वाले उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ भी होगा। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि दिल्ली सरकार की मौजूदा बिजली सब्सिडी जारी रहेगी।
उन्होंने कहा, “तीन किलोवाट की सौर प्रणाली लगभग 300 यूनिट बिजली पैदा कर सकती है। यदि कोई परिवार 200 यूनिट बिजली की खपत करता है तो वह अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर उसका भी लाभ उठा सकता है। इस तरह उपभोक्ता न केवल मुफ्त बिजली का इस्तेमाल करेंगे, बल्कि उसके उत्पादन में भी भागीदार बनेंगे और इस प्रक्रिया में आय भी अर्जित करेंगे।”
उन्होंने कहा कि ग्रिड में भेजी गई बिजली के लिए डिस्कॉम की औसत बिजली खरीद लागत के अनुसार भुगतान भी किया जाएगा
गुप्ता ने कहा कि सरकार ने सौर प्रणाली लगाने के साथ उसके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था को भी आसान बनाया है।
उनके मुताबिक, सौर विक्रेता पहले पांच साल तक प्रणाली का संचालन और रखरखाव मुफ्त उपलब्ध कराएंगे और इसके बाद उपभोक्ता अपनी इच्छानुसार बिजली वितरण कंपनियों के माध्यम से रखरखाव और बीमा की सुविधा ले सकेंगे और इससे सौर प्रणाली के लगभग 25 वर्ष के जीवनकाल तक उसके सुचारु संचालन में मदद मिलेगी। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि दिल्ली में अब तक 10,073 सौर ऊर्जा प्रणालियां स्थापित हो चुकी हैं और यह ज्यादातर सरकारी इमारतों में लगी हैं। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने इसी संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार ने इस झूठ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है कि मुफ्त बिजली को लंबे समय तक जारी नहीं रखा जा सकता।
उन्होंने कहा, “हमने न केवल मुफ्त बिजली की व्यवस्था को जारी रखा है, बल्कि इसे अगले 25 वर्षों के लिए सुरक्षित और संस्थागत भी किया है। दिल्ली सौर उर्जा नीति -2023 के दूसरे संशोधन को मंजूरी देने का ऐतिहासिक निर्णय इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
