मुंबई, पांच नवंबर रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.46 (अस्थायी) पर लगभग स्थिर रहा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिले समर्थन ने विदेशी बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती के असर को खत्म कर दिया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि पिछले कारोबारी सत्रों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेज सुधार के बाद भारतीय रुपये में निकट अवधि में स्थिरता के संकेत दिख रहे हैं।
हालांकि, घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने रुपये में गिरावट को सीमित किया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया कमजोर खुला और कारोबार के दौरान लुढ़ककर 94.57 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, अंतिम कारोबारी सत्र में रुपये ने कुछ नुकसान की भरपाई की और 94.46 (अस्थायी) पर रहा जो पिछले बंद भाव के बराबर है।
रुपया बुधवार को 29 पैसे चढ़कर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.46 पर बंद हुआ था। कोटक नियो में जिंस एवं मुद्रा शोध प्रमुख अनिंद्य बनर्जी ने कहा, ‘‘कई कारक रुपये के पक्ष में हैं। भारत के कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र में निवेश की वापसी के दौर से अलग नजर आने के कारण विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ सकता है।
अमेरिका में राजनीतिक अनिश्चितता से डॉलर पर दबाव पड़ सकता है। साथ ही कच्चे तेल की कीमत में हर एक डॉलर की गिरावट से भारत की आयात लागात कम हो सकता है।’’
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.06 प्रतिशत फिसलकर 101.50 पर आ गया। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 2,008.61 अंक उछलकर 79,310.01 अंक जबकि निफ्टी 576 अंक चढ़कर 24,536.60 अंक पर बंद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का भाव वायदा कारोबार में 1.38 प्रतिशत चढ़कर 95.93 डॉलर प्रति बैरल हो गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को शुद्ध रूप से 7,284.03 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।
