विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने जारी संघर्षों जिनमें पश्चिम एशिया के हालात और ग्लोबल साउथ के देशों पर उनका असर शामिल है।
यह मुलाकात तब हुई जब जयशंकर यूएन महासभा के हाई-लेवल सप्ताह के दौरान अपने कार्यक्रमों को पूरा कर रहे थे। यूएन प्रमुख के कार्यालय के अनुसार, बातचीत में बहुपक्षवाद, भारत-यूएन सहयोग और व्यापक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों जिनमें यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के हालात पर चर्चा हुई। जयशंकर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि आज यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत मौजूदा संघर्षों और उनके असर को कम करने की ज़रूरत पर केंद्रित रही, खासकर ‘ग्लोबल साउथ’ पर पड़ने वाले असर को लेकर।
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महासचिव के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि गुटेरेस और जयशंकर ने बहुपक्षवाद, भारत-यूएन सहयोग और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा की, जिसमें यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व की स्थिति शामिल है। इसमें यह भी कहा गया कि महासचिव ने यूएन के साथ भारत के सहयोग की सराहना की। शनिवार को जनरल डिबेट में भारत का राष्ट्रीय बयान देते हुए, जयशंकर ने दुनिया की इस संस्था के प्रमुख के तौर पर गुटेरेस की सेवाओं की तारीफ़ की। उन्होंने कहा बहुपक्षवाद के लिए एक दशक तक सेवा और समर्पण के बाद, हम जल्द ही सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस को विदाई देंगे। भारत उनके कई योगदानों, खासकर ‘मिशन LiFE’ के लिए उनके व्यक्तिगत समर्थन की बहुत कद्र करता है। यह गुटेरेस का UNGA (संयुक्त राष्ट्र महासभा) का आखिरी हाई-लेवल हफ़्ता था और UN प्रमुख के तौर पर उनका दूसरा पांच साल का कार्यकाल दिसंबर 2026 में खत्म हो रहा है। वे इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे। एशिया सोसाइटी में बोलते हुए जयशंकर ने यह भी कहा कि UN में “बहुत ही व्यस्त हफ़्ते” के दौरान वे अपने लगभग 85-90 समकक्षों से मिले, जो कई राजनयिक मुलाकातों का एक भरा-पूरा दौर था।
