नयी दिल्ली, छह अगस्त स्विगी ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह वित्त वर्ष 2030-31 तक अपने खाद्य वितरण और क्विक कॉमर्स कारोबार में वृद्धि के दम पर लगभग 10,000 करोड़ रुपये का समायोजित ईबीआईटीडीए हासिल करने का लक्ष्य रख रही है। ईबीआईटीडीए किसी कंपनी की असली परिचालन आय होती है जिसमें ब्याज, कर और मूल्यह्रास जैसी लागत को शामिल नहीं किया जाता। कंपनी ने ‘कैपिटल मार्केट्स डे 2026’ में कहा कि वह वित्त वर्ष 2025-26 के 67,734 करोड़ रुपये के सकल ऑर्डर मूल्य (जीओवी) को बढ़ाकर 2030-31 तक करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये करने का अनुमान लगा रही है।
यह सालाना आधार पर 30 प्रतिशत की वृद्धि है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का एकीकृत समायोजित ईबीआईटीडीए सालाना आधार पर 162 करोड़ रुपये सुधरा, जिससे उसका घाटा घटकर 651 करोड़ रुपये रह गया। स्विगी के प्रबंध निदेशक और समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीहर्ष मजेटी ने कहा, “हम खाद्य वितरण, क्विक कॉमर्स और घर के बाहर खानपान पर खर्च जैसे तीन बड़े एवं तेजी से बढ़ते उपभोक्ता क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिनमें आने वाले वर्षों में मजबूत वृद्धि की संभावना है।”
कंपनी ने कहा कि वित्त वर्ष 2030-31 तक उसका खाद्य वितरण कारोबार 2.5 से 3.5 गुना तक बढ़ सकता है और लगभग 5,000 करोड़ रुपये का समायोजित ईबीआईटीडीए दे सकता है।
वहीं, डाइनआउट कारोबार 20,000-25,000 करोड़ रुपये के जीओवी और करीब 1,000 करोड़ रुपये ईबीआईटीडीए के लक्ष्य के साथ पांच गुना वृद्धि का लक्ष्य रखता है। कंपनी की त्वरित आपूर्ति इकाई इंस्टामार्ट ने 2026-27 की पहली तिमाही में 7,907 करोड़ रुपये का जीओवी दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 40 प्रतिशत अधिक है। कंपनी ने कहा कि बेहतर इकाई अर्थशास्त्र के कारण लागत में कमी आई है और 45 प्रतिशत से अधिक स्टोर अब योगदान स्तर पर लाभ में हैं।
स्विगी ने बताया कि इंस्टामार्ट 2030-31 तक 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक जीओवी का लक्ष्य रखती है, जिसके लिए चार करोड़ से अधिक मासिक ग्राहकों तक पहुंचने की योजना है। कंपनी ने कहा कि वह कर्ज-मुक्त है और उसके पास 14,400 करोड़ रुपये की नकद राशि उपलब्ध है। कंपनी ने ‘निवेशक-स्वामित्व वाली कॉमर्स कंपनी’ बनने की दिशा में प्रगति का भी जिक्र करते हुए कहा कि एक जुलाई, 2026 को घरेलू हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो गई।
निदेशक मंडल ने 18 अगस्त को होने वाली 13वीं वार्षिक आम बैठक से पहले विदेशी हिस्सेदारी की सीमा बढ़ाकर 49.5 प्रतिशत करने को मंजूरी दी है।
