कारगिल की दुर्गम चोटियों से लेकर ऑस्ट्रेलिया के आसमान और हिंद महासागर की अथाह गहराइयों तक भारत की तीनों सेनाएं इस समय जिस तरह अपनी ताकत, तकनीक और युद्धक क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं, उसने चीन और पाकिस्तान दोनों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि नया भारत केवल अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं करता, बल्कि किसी भी चुनौती का निर्णायक जवाब देने की क्षमता रखता है। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के हालिया अभियान यह साबित करते हैं कि देश की सैन्य शक्ति अब पारंपरिक युद्धक क्षमता से आगे बढ़कर अत्याधुनिक तकनीक, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और बहु-आयामी युद्ध कौशल के नए युग में प्रवेश कर चुकी है।
हम आपको बता दें कि हाल ही में 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर लद्दाख के द्रास सेक्टर के मटायेन में भारतीय सेना ने लाइव ऑपरेशनल डेमोंस्ट्रेशन के जरिए अपने आधुनिक युद्ध कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। यह केवल एक सैन्य प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि भी थी जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देकर तिरंगे की आन-बान-शान को अक्षुण्ण रखा।
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फायर एंड फ्यूरी कोर की अगुवाई में आयोजित इस प्रदर्शन में सेना ने कठिन पर्वतीय इलाकों में युद्ध संचालन की अपनी अभूतपूर्व क्षमता दिखाई। छोटे-छोटे विशेष ऑपरेशन दलों, ड्रोन, रिमोटली पायलटेड एरियल सिस्टम, हाई मोबिलिटी रिकॉनिसेंस व्हीकल, क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल, स्पेशल मोबिलिटी प्लेटफॉर्म, ऑल-टेरेन ‘चेतक’ वाहन और अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय सेना अब भविष्य के नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है।
यह प्रदर्शन इस बात का प्रमाण था कि ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में अब भारतीय सेना केवल साहस के भरोसे नहीं, बल्कि तकनीक, रियल-टाइम इंटेलिजेंस और सटीक हमले की क्षमता के साथ दुश्मन को परास्त करने के लिए तैयार है।
दूसरी ओर, भारतीय वायुसेना ऑस्ट्रेलिया में आयोजित दुनिया के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यासों में से एक ‘एक्सरसाइज पिच ब्लैक-2026’ में अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रही है। डार्विन के प्रतिष्ठित मिंडिल बीच के ऊपर भारतीय राफेल लड़ाकू विमान की फ्लाईपास्ट ने उद्घाटन समारोह को ऐतिहासिक बना दिया।
20 देशों की वायु सेनाओं और 100 से अधिक सैन्य विमानों की मौजूदगी वाले इस अभ्यास में भारत ने चार-राफेल, दो C-17 ग्लोबमास्टर परिवहन विमान और 120 से अधिक सैन्यकर्मियों को तैनात किया है। इतना ही नहीं, भारतीय दल ने बहुराष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अनुशासन, टीमवर्क और उत्कृष्टता का भी परिचय दिया।
इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य केवल संयुक्त प्रशिक्षण नहीं, बल्कि जटिल हवाई अभियानों में विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है। भारत के लिए यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ युद्धक समन्वय मजबूत करने का बड़ा अवसर है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ द्वारा भारतीय दल से मुलाकात इस बात का संकेत है कि भारत आज वैश्विक सुरक्षा संरचना में एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद सैन्य साझेदार बन चुका है।
वहीं भारतीय नौसेना भी तेजी से अपने इतिहास के सबसे बड़े विस्तार अभियान पर काम कर रही है। वर्ष 2035 तक 200 से अधिक युद्धपोतों वाली नौसेना तैयार करने का लक्ष्य चीन और पाकिस्तान की बढ़ती समुद्री चुनौतियों का रणनीतिक उत्तर है। हम आपको बता दें कि वर्तमान में भारतीय नौसेना के पास लगभग 140-150 पोत हैं, जिनमें करीब 135 अग्रिम मोर्चे के युद्धपोत शामिल हैं। लगभग 50 युद्धपोत और पनडुब्बियां भारतीय शिपयार्डों में निर्माणाधीन हैं, जबकि 2.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के तहत दर्जनों नए युद्धपोतों और पनडुब्बियों को मंजूरी मिल चुकी है।
सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि भारत अब औसतन हर 40 दिन में एक नया स्वदेशी युद्धपोत या पनडुब्बी नौसेना में शामिल कर रहा है। हाल ही में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक से निर्मित स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि और 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से तैयार एंटी-सबमरीन युद्धपोत INS मालवन को नौसेना में शामिल किया गया। इसके बाद आने वाले सभी प्रमुख युद्धपोत पूरी तरह भारतीय शिपयार्डों में तैयार होंगे। रूस से मिला INS तमाल इस श्रृंखला का अंतिम विदेशी मूल का प्रमुख युद्धपोत माना जा रहा है।
देखा जाये तो भारतीय नौसेना का यह विस्तार सीधे तौर पर चीन की बढ़ती समुद्री आक्रामकता और पाकिस्तान की चीनी तकनीक से लैस नई पनडुब्बियों के जवाब में देखा जा रहा है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बन चुकी है और वह हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। दूसरी ओर पाकिस्तान ने चीन निर्मित हैंगोर श्रेणी की अत्याधुनिक पनडुब्बियों को शामिल कर अपनी समुद्री क्षमता को मजबूत करना शुरू कर दिया है।
ऐसी स्थिति में भारत की रणनीति केवल प्रतिरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री नियंत्रण, महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और किसी भी बहु-आयामी खतरे का निर्णायक जवाब देने की क्षमता विकसित करना है।
साथ ही तीनों सेनाओं की ये समानांतर गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि भारत अब आधुनिक सैन्य शक्ति का निर्माता बन रहा है। ड्रोन आधारित युद्ध, नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन, स्टील्थ युद्धपोत, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और मित्र देशों के साथ उच्च स्तरीय सैन्य सहयोग, ये सभी भारत की दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के मजबूत स्तंभ बन चुके हैं। कारगिल की बर्फीली चोटियों पर भारतीय सेना का पराक्रम, ऑस्ट्रेलिया के आसमान में राफेल की गर्जना और हिंद महासागर में नौसेना का विस्तार, ये तीनों घटनाएं मिलकर एक ही संदेश देती हैं कि भारत अब हर मोर्चे पर तैयार है।
इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीय सैनिकों का अदम्य साहस, अनुशासन और मातृभूमि के प्रति समर्पण ही वह शक्ति है जिसने देश को विश्व की अग्रणी सैन्य ताकतों की कतार में खड़ा किया है। यदि किसी भी शत्रु ने भारत की संप्रभुता या राष्ट्रीय हितों को चुनौती देने का दुस्साहस किया, तो उसे केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि आसमान, समुद्र और हर युद्धक्षेत्र में भारतीय सैन्य शक्ति की संयुक्त, सटीक और प्रचंड प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
-नीरज कुमार दुबे
