देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखें भले ही चुनाव आयोग ने घोषित कर दी हों, लेकिन इस समय सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की राजनीति की ही हो रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने से पहले ही जनता के मन में मुख्यमंत्री पद को लेकर सवाल उठ रहे थे कि राज्य की बागडोर किसके हाथों में होगी। हालांकि नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव जीत लिया है, लेकिन भाजपा ने अभी तक मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
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दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जमुई दौरे के दौरान ऐसा बयान दिया जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “अब ये सारा काम करेंगे।” नीतीश कुमार के इस बयान से कई राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। नीतीश के इस बयान के बाद यह अटकलें लगने लगी हैं कि क्या बिहार में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई बड़ा संकेत दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह बयान सामान्य नहीं है।
इसे भविष्य की राजनीति और जिम्मेदारियों के बंटवारे का संकेत माना जा रहा है। कुछ विशेषज्ञ इसे सम्राट चौधरी की बढ़ती भूमिका के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे सत्ता में संभावित बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं। यह उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार वास्तव में मधेपुरा, किशनगंज, कटिहार, बेगूसराय सहित विभिन्न जिलों में बार-बार सम्राट चौधरी को मंच पर लाते हैं और लोगों से अपील करते हैं कि जिस तरह उन्होंने हमारा साथ दिया है, उसी तरह उनकी भी मदद करें। इतना ही नहीं, सहरसा में नीतीश कुमार ने यहां तक कह दिया कि अब इन लोगों को सब कुछ देखना होगा।
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हालांकि, बिहार में सत्ता में बदलाव का पूरा फॉर्मूला सामने नहीं आया है। किस पार्टी का मुख्यमंत्री बनेगा, इसको लेकर भी फिलहाल कोई चर्चा नहीं हो रही है। भाजपा ने भी अभी तक कोई नाम आगे नहीं किया है। क्या भाजपा सम्राट चौधरी को भी राज्य की कमान सौंपने जा रही है, यह भी साफ नहीं हो पाया है। भागलपुर में नीतीश कुमार की सभा के बारे में बात करते हुए, भाषण के बाद नीतीश कुमार ने मंच से कहा, “ठीक है, रुकिए, इन्हें भी बुला लेते हैं।” यह कहते ही नीतीश कुमार सम्राट चौधरी के पास पहुँचे और मुस्कुराते हुए उनका हाथ पकड़कर उन्हें आगे ले गए। यहाँ सम्राट चौधरी मंच से हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन करते हैं, जबकि अन्य नेता हाथ उठाकर जनता को संबोधित करते हैं।
