अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई बेहद तेज कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल घोटाले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से लगभग तीन घंटे तक गहन पूछताछ की और उनका आधिकारिक बयान दर्ज किया। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं ने चंपत राय के सामने प्रशासनिक फैसलों, दान प्रबंधन (Donation Management) और नियुक्तियों से जुड़े कई तीखे सवाल रखे, जिनमें से कई अहम सवालों के जवाब वे नहीं दे पाए।
अयोध्या में राम मंदिर में दान चोरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने राय से पूछताछ की।
चंपत राय ने क्या कहा?
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस अब चंपत राय के बयान की तुलना जांच के दौरान सामने आए दूसरे गवाहों, दस्तावेज़ों और तथ्यों से करेगी। SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद, पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। उम्मीद है कि SIT जुलाई के पहले हफ़्ते में अयोध्या पहुंचेगी, अपनी जांच पूरी करेगी और सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी।
पूछताछ के दौरान, चंपत राय ने पुलिस को बताया कि दान चोरी मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें इस मामले का पता चला, उन्होंने तुरंत कार्रवाई की, संदिग्धों को पकड़ा और पुलिस में FIR दर्ज कराई। उन्होंने आगे कहा, “मैंने व्यक्तिगत रूप से SIT के पास शिकायत दर्ज कराई, और उसी के आधार पर मामला दर्ज किया गया। हाँ, शिकायत दर्ज कराने में देरी करना और खुद ही आंतरिक जांच जारी रखना मेरी गलती थी।”
पूछताछ के दौरान, चंपत राय ने पुलिस को बताया कि दान चोरी में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें मामले की जानकारी मिली, उन्होंने संदिग्धों की पहचान करके और पुलिस में FIR दर्ज कराकर तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से SIT के पास गया और मेरी शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया। हाँ, यह मेरी गलती थी कि मैंने मामले की आंतरिक जांच करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में देरी की।”
तिन्नू यादव पर चंपत राय
हालांकि, चंपत राय ने यह भी माना कि दान प्रणाली में कोई गड़बड़ी न हो, यह सुनिश्चित करना उनकी ज़िम्मेदारी थी। तिन्नू यादव से जुड़े सवालों पर चंपत राय ने कहा कि तिन्नू लंबे समय से मंदिर प्रबंधन से जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा, “तिन्नू ने कुछ गलत किया, और इसकी उम्मीद नहीं थी।” पुलिस ने उनसे यह भी पूछा कि राम मंदिर से जुड़े कामों के लिए रिश्तेदारों या जान-पहचान वालों को किस आधार पर काम सौंपा गया था। चंपत राय ने जवाब दिया कि यह काम ज़रूरतमंद और गरीब लोगों को दिया गया था। उन्होंने कहा कि इन नियुक्तियों में सिर्फ़ उनकी ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट के दूसरे सदस्यों की भी भूमिका थी।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान चंपत राय ने अनिल और गोपाल राव का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि लोगों को काम पर रखने में उनकी सिफारिशों का भी इस्तेमाल किया गया था। ज़्यादातर मामलों में नियुक्तियां गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की मदद करने के मकसद से की गई थीं, लेकिन यह उम्मीद नहीं थी कि कोई ऐसी गड़बड़ी करेगा।
ट्रस्ट के सदस्यों की आर्थिक जानकारी जुटा रही पुलिस
खबरों के मुताबिक, पुलिस चंपत राय, गोपाल राय और अनिल मिश्रा समेत ट्रस्ट के कई सदस्यों की आर्थिक जानकारी जुटा रही है। बताया जा रहा है कि उनके बैंक खातों और संपत्तियों की भी जांच चल रही है। जांच करने वालों का मानना है कि चंपत राय अच्छे एडमिनिस्ट्रेटर नहीं हैं और उन्होंने लापरवाही बरती है।
सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या पुलिस ने जेल में कुछ आरोपियों से पूछताछ करने के लिए अर्ज़ी दी है, लेकिन कोर्ट ने अभी तक इजाज़त नहीं दी है। इजाज़त मिलने के बाद, पुलिस जल्द ही इस मामले में सभी आठ आरोपियों – जिनमें तिन्नू यादव, अविनाश शुक्ला और लवकुश शामिल हैं – से जेल में पूछताछ कर सकती है।
