पीओके में बिगड़ते हालात और पश्चिम एशिया में गहराते संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद भवन में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की विशेष बैठक की अध्यक्षता की। सुरक्षा से लेकर ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक हितों तक, सरकार ने एक साथ कई मोर्चों पर रणनीति की समीक्षा की। बैठक का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत में पेट्रोलियम उत्पादों, एलएनजी-एलपीजी, उर्वरकों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होने दी जाएगी। लगातार चौथी बार बुलाई गई इस विशेष सीसीएस बैठक ने स्पष्ट कर दिया कि केंद्र सरकार पश्चिम एशिया के संकट के भारत पर पड़ने वाले हर संभावित असर पर बारीकी से नजर रख रही है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे उत्पन्न भू-राजनीतिक परिस्थितियों की व्यापक समीक्षा की गई। साथ ही विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों का आकलन भी किया गया। हम आपको बता दें कि यह इस मुद्दे पर आयोजित चौथी विशेष सीसीएस बैठक थी, जिससे सरकार की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अलावा विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और एनएसए अजित डोभाल भी शामिल हुए। इन मंत्रियों ने अपने-अपने मंत्रालयों की तैयारियों और उन कदमों की जानकारी दी, जिनके जरिए पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, उर्वरक और अन्य जरूरी वस्तुओं के आयात में किसी तरह की रुकावट न आए।
बैठक में कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने विस्तृत प्रस्तुति देते हुए वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों, एलएनजी, एलपीजी और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए हैं। एलपीजी की खरीद के स्रोतों में पहले ही विविधता लाई जा चुकी है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है। साथ ही देश में प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार और आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक बनी हुई है।
मोदी सरकार ने बैठक में भरोसा दिलाया कि कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियां 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं। इससे पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन निर्बाध रूप से जारी है। यानी अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर तनाव के बावजूद घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता को लेकर फिलहाल किसी संकट की आशंका नहीं है।
बैठक में यह भी बताया गया कि सरकार प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शनों का विस्तार होने से उपभोक्ताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही राष्ट्रीय गैस ग्रिड का विस्तार, एलएनजी आयात और री-गैसीफिकेशन अवसंरचना को मजबूत करने, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बढ़ाने तथा पाइपलाइन और अंतिम चरण की कनेक्टिविटी को समयबद्ध मंजूरी देने जैसे कदम भी तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य उद्योगों में एलपीजी के स्थान पर प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देना भी है।
साथ ही रबी सीजन को देखते हुए उर्वरकों की उपलब्धता भी बैठक का अहम एजेंडा रही। आगामी फसल चक्र के लिए आवश्यक उर्वरकों की मांग का आकलन किया गया और वैकल्पिक आयात स्रोतों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसानों को उर्वरकों की आपूर्ति किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए और इसके लिए हर आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाएं।
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, देश के आर्थिक हितों की रक्षा और वैश्विक संघर्षों के कारण उत्पन्न आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं को दूर करने के लिए समन्वित रणनीति पर काम करने के निर्देश भी दिए। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य, ब्लैक सी, रेड सी और गल्फ ऑफ एडन जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में बढ़ते तनाव को देखते हुए वैकल्पिक आपूर्ति तंत्र और आयात व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बहरहाल, सीसीएस की इस उच्चस्तरीय बैठक ने संकेत दिया कि सरकार केवल सुरक्षा चुनौतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को भी समान प्राथमिकता दे रही है। वैश्विक तनाव के इस दौर में भारत की रणनीति स्पष्ट है कि आपूर्ति श्रृंखला हर हाल में सुचारु रहे, नागरिकों के हित सुरक्षित रहें और देश की अर्थव्यवस्था पर बाहरी संकटों का असर न्यूनतम हो।