जेनेवा में यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल (UNHRC) के 63वें सेशन में शामिल होने के बाद, सामाजिक-राजनीतिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर ने ANI से खास बातचीत में पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के हालात पर चिंता जताई। उन्होंने इस इलाके में नागरिक आज़ादी पर लगी पाबंदियों, हिंसा और सेना के दखल का ज़िक्र किया। यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की बातों का ज़िक्र करते हुए अख्तर ने कहा कि उनके बयान से ही आतंकवाद की समस्या का दायरा पता चलता है। उन्होंने कहा, देखिए, जब हम शहबाज़ शरीफ़ का बयान देखते हैं, तो उन्होंने कहा कि अगर हमने आतंकवादियों को नहीं रोका, तो वे लंदन से लेकर अमेरिका तक फैल जाएंगे। शहबाज़ ने खुद दुनिया को बताया है कि वे एक टेरर इंडस्ट्री (आतंकवाद के उद्योग) से आते हैं।
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अख्तर ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के बार-बार कश्मीर का मुद्दा उठाने पर भी सवाल उठाए, जबकि उस इलाके में हिंसा जारी है। उन्होंने कहा वे बार-बार कश्मीर का मुद्दा उठाते हैं – वही कश्मीर जहाँ वे हत्याएँ करते हैं। मैं किसी देश को निशाना नहीं बना रही हूँ, लेकिन मैं पूछ रही हूँ: जिस कश्मीर को लेकर वे मुद्दा बनाते हैं, वहाँ वे हत्याएँ क्यों करते हैं? लोगों की हत्याएँ करने के बाद वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसके बारे में कैसे बात कर सकते हैं? PoJK के लोगों के अधिकारों पर अख्तर ने कहा कि उन्हें भी वही बुनियादी अधिकार मिलने चाहिए जो दूसरी जगहों के लोगों को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि PoJK के लोगों को भी वे सभी बुनियादी अधिकार मिलने चाहिए जिनके हर इंसान हकदार है। वे (पाकिस्तान) दावा करते रहते हैं कि PoJK के लोग आज़ाद हैं, लेकिन अगर ऐसा होता, तो वहां 4 महीने तक इंटरनेट बंद नहीं रहता और न ही वहां खून-खराबा होता।
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अख्तर ने कहा कि PoJK में जो लोग अपने प्रतिनिधि चाहते थे, उन्हें वहां नाइंसाफी का सामना करना पड़ा। पाकिस्तानी प्रशासन ने वहां एक तानाशाही सरकार बिठा रखी है और वहां वही होता है जो पाकिस्तानी सेना चाहती है।” उन्होंने पाकिस्तान पर जम्मू-कश्मीर में हिंसा और डर का माहौल बनाने का आरोप भी लगाया और कहा कि उनकी कोशिशें आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हैं।
