देश की सबसे बड़ी गैस आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने अपने निदेशकों को मुनाफे के आधार पर दिए जाने वाले कमीशन की व्यवस्था को 2026-27 से अगले पांच साल तक जारी रखने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगी है। कंपनी के आगामी आम बैठक के नोटिस के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निदेशकों को हर वर्ष कंपनी के मुनाफे का अधिकतम एक प्रतिशत कमीशन के रूप में दिया जा सकेगा। इस राशि का निदेशकों के बीच वितरण निदेशक मंडल द्वारा तय किया जाएगा।
शेयरधारकों ने इससे पहले सितंबर, 2021 में वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक के लिए इस व्यवस्था को मंजूरी दी थी। इससे पहले भी 2007, 2011 और 2016 में इसी तरह के प्रस्तावों को मंजूरी मिल चुकी है। कंपनी ने कहा है कि उसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को देखते हुए कमीशन की व्यवस्था को आगे जारी रखने का प्रस्ताव रखा गया है।
वित्त वर्ष 2025-26 में पेट्रोनेट एलएनजी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अक्षय कुमार सिंह और अन्य पूर्णकालिक निदेशकों को 26.5-26.5 लाख रुपये का कमीशन मिला था। इससे पिछले वित्त वर्ष में यह राशि 25.5 लाख रुपये थी। कमीशन समेत सिंह का कुल पारिश्रमिक वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3.64 करोड़ रुपये हो गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 3.03 करोड़ रुपये था।
कंपनी के स्वतंत्र निदेशकों को भी वित्त वर्ष 2025-26 में लाभ पर 10 लाख रुपये का कमीशन मिला। इसके अलावा उन्हें बैठक में भाग लेने के लिए निर्धारित शुल्क भी दिया गया। पेट्रोनेट के अनुसार, वास्तविक रूप से दिया गया कमीशन वैधानिक सीमा से काफी कम रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 में पूर्णकालिक निदेशकों के लिए अधिकतम कमीशन 79.5 लाख रुपये और स्वतंत्र निदेशकों के लिए 55 लाख रुपये था। इस तरह कुल अधिकतम सीमा 134.5 लाख रुपये थी। कंपनी ने कहा कि कमीशन की राशि कर-पूर्व लाभ के मुकाबले मामूली है और कंपनी अधिनियम, 2013 में निर्धारित समग्र सीमा के भीतर है।
वित्त वर्ष 2025-26 में पेट्रोनेट एलएनजी का शुद्ध लाभ 3,843 करोड़ रुपये रहा, जबकि कंपनी का राजस्व 43,495 करोड़ रुपये था। इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 3,926 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ और 50,980 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया था। अक्षय कुमार सिंह को पिछले वर्ष प्रबंध निदेशक एवं सीईओ के रूप में मई, 2027 तक 15 महीने का सेवा विस्तार दिया गया था।
वह 12 मई, 2027 को 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होंगे। सिंह ने एक फरवरी, 2020 को पेट्रोनेट एलएनजी के सीईओ का पद संभाला था। कंपनी ने सिंह के उत्तराधिकारी की तलाश की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
पेट्रोनेट के निदेशक मंडल में नियुक्तियां बोर्ड की खोज-सह-चयन समिति की सिफारिश के आधार पर होती हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष होती है, लेकिन केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के शीर्ष नौकरशाह की अगुवाई वाली पेट्रोनेट प्राइवेट लि. कंपनी के रूप में पंजीकृत है। पेट्रोनेट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग), केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दायरे में नहीं आती है।
साथ ही यह सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दायरे से भी बाहर है। इसके कार्यकारियों को अन्य सार्वजनिक उपक्रमों की तुलना में अधिक वेतन मिलता है। साथ ही उनके लिए सेवानिवृत्ति आयु भी 65 वर्ष है।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), गेल इंडिया, ओएनजीसी और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) में से प्रत्येक की पेट्रोनेट एलएनजी में 12.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इन चारों कंपनियों के प्रमुख पेट्रोनेट के बोर्ड में भी शामिल हैं।
