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मीटिंग के बाद मीडिया से बात करते हुए अलीमा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खुशी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा मैं इस मीटिंग को लेकर कितनी खुश हूँ, इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। मैं सोच भी नहीं सकती थी कि मुझे मिठाइयाँ कहाँ से मिलेंगी। मैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ATC रावलपिंडी के सामने पेश हुई हूँ। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें हालात बदलने का कोई संकेत मिला था, तो अलीमा ने कहा, “हमें संकेत कहाँ से मिलना था? क्या आप इस मीटिंग की बात कर रहे हैं? हाँ, कुछ तो हुआ है, लेकिन हम अभी भी पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकते। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, कोर्ट के आदेश के बाद इमरान की तीन बहनों में से एक, नूरीन, अडियाला जेल जाने वाली सड़क पर बने डहगल चेकपॉइंट पर पहुँचीं। पुलिस ने शुरू में अलीमा, डॉ. उज़मा और नूरीन को चेकपॉइंट पर रोक दिया था, लेकिन बाद में सिर्फ़ नूरीन को जेल की तरफ़ जाने की इजाज़त दी।
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यह घटनाक्रम पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट की तीन-सदस्यीय बेंच के उस आदेश के बाद हुआ, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस शाहिद वहीद कर रहे थे। बेंच ने दिन में सरकार को निर्देश दिया था कि इमरान की सेहत को लेकर चिंताओं के बीच उन्हें और उनके परिवार को हर हफ़्ते मिलने की सुविधा दी जाए। अदालत PTI के संस्थापक की अपनी बहनों और निजी डॉक्टरों से मुलाक़ात, और उनकी मेडिकल स्थिति से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
यह आदेश सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सौंपी गई मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और अदियाला जेल सुपरिटेंडेंट की रिपोर्ट के बाद आया। रिपोर्ट में इमरान के ब्लड प्रेशर और एंग्जायटी को कंट्रोल करने में मदद के लिए उनके करीबी परिवार और पत्नी के साथ ज़्यादा बार मुलाक़ात की सलाह दी गई थी, साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री के ब्लड प्रेशर को लेकर चिंता भी जताई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मुलाक़ात की इजाज़त इस शर्त पर दी कि PTI के प्रतिनिधि इमरान से मिलने के बाद किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि या मीडिया से बातचीत नहीं करेंगे; पार्टी ने कहा कि वह इस शर्त का पालन करेगी। जस्टिस वहीद ने ज़ोर देकर कहा कि परिवार से मिलने की सुविधा को कोई एहसान नहीं माना जा सकता; उन्होंने इन मुलाक़ातों को कोई रियायत नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार बताया। इस बीच, खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया। एक पोस्ट में उन्होंने कहा इमरान खान को उनके परिवार और निजी डॉक्टरों की मौजूदगी में चेक-अप और इलाज के लिए तुरंत अस्पताल भेजने का सुप्रीम कोर्ट का सही फ़ैसला तारीफ़ के काबिल है। उम्मीद है कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाएगा
