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महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया अशोक खरात कांड देशभर में सनसनी फैला चुका है। खुद को धर्मगुरु और अंक ज्योतिष विशेषज्ञ बताने वाला यह व्यक्ति अब गंभीर यौन शोषण, ठगी और काले अनुष्ठानों के आरोपों…
राजधानी दिल्ली से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां देश की सुरक्षा एजेंसियों के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। दरअसल खुफिया एजेंसियों से मिली पक्की जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल…
वाशिंगटन में एक महत्वपूर्ण सैन्य विकल्प पर विचार चल रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बात पर गौर कर रहे हैं कि क्या ईरान से लगभग 1,000 पाउंड (453.5 किलोग्राम) समृद्ध यूरेनियम निकालने के लिए अमेरिकी…
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति को देखते हुए भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने…
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई…
असम विधानसभा चुनाव से पहले, कांग्रेस ने राज्य की सत्ता में वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के पलक्कड़ में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा के चुनाव अभियान की…
गृह मंत्री अमित शाह ने असम के सोनितपुर जिले की ढेकियाजुली विधानसभा में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। अपने…
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि नैतिक जिम्मेदारी को कानूनी जिम्मेदारी के…
तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के प्रमुख विजय ने आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए बड़ा ऐलान किया है। विजय 23…
दिल्ली नगर निगम के पुराने नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली गई है। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अमेरिका-ईरान…
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर ‘इथेनॉल मिश्रण’ को…
आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष वाईएस शर्मिला रेड्डी ने अमरावती को राज्य की राजधानी का वैधानिक दर्जा देने वाले…
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में मंत्रियों के एक अनौपचारिक समूह ने पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न स्थिति पर…
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भारत और चीन के बीच व्यापार का रिश्ता आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां सच्चाई और दिखावा आमने सामने खड़े हैं। ऊपर से सब…
सुपर आठ के मुकाबले जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे हैं, मुकाबलों की अहमियत भी बढ़ती जा रही है।…
वनडे विश्व कप जीतने के करीब तीन महीने बाद मैदान पर उतरी टीम को ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया…
भारत का एफआईएच पुरुष प्रो लीग में निराशाजनक प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा जब यहां स्पेन…
मंगलवार को ब्रिस्बेन के एलन बॉर्डर फील्ड में खेले गए वनडे द्विपक्षीय श्रृंखला के पहले मैच में…
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने मंगलवार को आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 का पूरा कार्यक्रम जारी…
शानदार ग्रुप स्टेज के बाद, आठ टीमें – भारत, दक्षिण अफ्रीका, वेस्ट इंडीज, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, इंग्लैंड, जिम्बाब्वे…
साउथ इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बना चुके नागा चैतन्य ने साल 2022 में आमिर खान के साथ फिल्म लाल सिंह चड्ढा के जरिए हिंदी सिनेमा में कदम रखा था। हालांकि फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली, लेकिन चैतन्य के लिए यह अनुभव किसी मायने में नकारात्मक नहीं रहा। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म के बाद उन्होंने अब तक कोई नई हिंदी फिल्म साइन नहीं की है—और इसकी वजह वो किसी असफलता को नहीं मानते। इसे भी पढ़ें: ‘सिगरेट नहीं पी, बस फोन तोड़े थे’… R Madhavan से तुलना पर Paresh Rawal का जवाब हुआ Viralचैतन्य का कहना है कि हिंदी फिल्मों से दूरी किसी खास रणनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि पिछले कुछ समय से वह अपने साउथ प्रोजेक्ट्स में इतने व्यस्त रहे कि उनका पूरा फोकस वहीं चला गया। उनके मुताबिक, “ऐसा नहीं है कि मैं हिंदी फिल्मों के बारे में सोच…
विदेश घूमने का अपना ही एक अलग मजा होता है। खासतौर पर अगर पार्टनर के साथ ट्रिप प्लान…
सड़कों से गायब होते फुटपाथ आज भारत के शहरी जीवन की एक कठोर सच्चाई बन चुके हैं, और अभी तक की स्थिति तक उपलब्ध नवीनतम सरकारी रिपोर्टों, नीतिगत दस्तावेजों और विश्वसनीय अध्ययनों को देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि यह समस्या न तो नई है और न ही आकस्मिक, बल्कि यह लगातार उपेक्षा, कमजोर शहरी नियोजन और प्रशासनिक निष्क्रियता का परिणाम है। भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट “रोड एक्सीडेंट इन इंडिया 2022” के अनुसार देश में कुल सड़क दुर्घटना मृत्यु में लगभग 19 प्रतिशत पैदल यात्रियों की हिस्सेदारी रही। इसका सीधा अर्थ…
हवाई यात्रियों के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है, जिससे फ्लाइट में सीट चयन को लेकर लंबे…
सरकार ने टीवी रेटिंग नीति 2026 शुक्रवार को जारी की जिसमें देश में टेलीविजन रेटिंग के नियमन के लिए व्यापक…
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कुछ निर्देशों का पालन न करने के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया,…
मार्च का महीना आते ही हर तरफ से टैक्स बचाने की सलाह और निवेश के कॉल्स आने लगते हैं। अक्सर…
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उद्योगपति अनिल अंबानी के समूह की कंपनी ‘रिलायंस पावर लिमिटेड’ से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ जांच…
देश में समय के साथ लोकतंत्र के परिपक्कव होने के बजाए कमजोर होने की आहट आ रही है। आजादी के बाद देश में ऐसा पहली बार हुआ है कि संवैधानिक संस्थाओं को पक्षपात के आरोपों के कारण कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। इन संस्थाओं के कामकाज के तौर—तरीकों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इन पर पूरी तरह से सत्तारुढ केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के इशारों पर काम करने करने और विपक्ष के अधिकारों को दबाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोपों के इस घेरे में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के सभापति रहे जगदीप धनखड़, भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक और अब मुख्य चुनाव आयुक्त आ चुके हैं।लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए 118 विपक्षी सांसदों के समर्थन से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। विपक्षी सांसदों का दावा था कि ओम बिरला ने “पक्षपातपूर्ण व्यवहार” दिखाया है और उनका कार्यालय अपेक्षित निष्पक्षता बनाए रखने में विफल…
धर्म, जाति और धर्मांतरण का प्रश्न भारत के सामाजिक, संवैधानिक और राष्ट्रीय जीवन से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील और जटिल विषय है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह निर्णय कि यदि अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को स्वीकार कर लेता है तो वह अनुसूचित जाति का संवैधानिक दर्जा और उससे जुड़े लाभों का अधिकारी नहीं रहेगा, केवल एक सामान्य कानूनी निर्णय नहीं है, बल्कि यह भारतीय संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय की अवधारणा और राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता को ध्यान में रखकर दिया गया एक दूरगामी और ऐतिहासिक निर्णय है। इस निर्णय को भारतीय न्याय व्यवस्था की परिपक्वता, संतुलन और दूरदर्शिता का प्रतीक कहा जा सकता है।भारत में अनुसूचित जाति की व्यवस्था का निर्माण किसी धर्म विशेष को लाभ देने के लिए नहीं किया गया था, बल्कि उन सामाजिक वर्गों को संरक्षण और अवसर देने के लिए किया…
धार्मिक स्थलों को बंदरों से क्यों नही मिलती मुक्ति। सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि इन स्थानों पर आने वाले श्रृद्धालु कब तक इनके आंतक झेलते रहेंगे? कब तक इनका शिकार होते रहेंगे?हाल में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु अपने कार्यकाल में 19 मार्च को वृंदावन आईं। वे दूसरी बार यहां आईं है। इससे पहले इसी पद पर रहते हुए प्रणब मुखर्जी व रामनाथ कोविंद भी अपने कार्यकाल में दो बार वृंदावन आए थे। लेकिन, राष्ट्रपति मुर्मु वृंदावन के तीन दिवसीय प्रवास पर आने वाली पहली राष्ट्रपति हैं। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्रप्रसाद, ज्ञानी जैल सिंह एक बार वृंदावन आए। उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए डॉक्टर शंकरदयाल शर्मा, आर वेंकटरामन, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन भी वृंदावन अपनी धार्मिक यात्रा पर आ चुके हैं।इसे भी पढ़ें: President Murmu के Vrindavan दौरे से पहले हाई अलर्ट, चश्मा चोर बंदरों को डराएंगे लंगूर के कटआउटनिवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी दो बार वृंदावन आए। आश्रय…
आजकल आधार कई सरकारी सर्विस और स्कीम का एक ज़रूरी हिस्सा बन गया है। आधार का इस्तेमाल लगभग हर सर्विस में पहचान वेरिफिकेशन के लिए किया जाता है, चाहे वह बैंक अकाउंट हो, मोबाइल नंबर हो, गैस सब्सिडी हो या पेंशन हो। ऐसे में पेंशन अकाउंट, खासकर EPF (एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड) से आधार को लिंक करना फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि पेंशन अकाउंट से आधार को लिंक करना ज़रूरी नहीं है, लेकिन इससे आपकी पहचान और डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई करना आसान हो जाता है। इससे भविष्य में क्लेम, पेंशन ट्रांसफर और दूसरी सर्विस में देरी की संभावना कम हो सकती है। अच्छी बात यह है कि आप आसानी से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से अपने पेंशन अकाउंट से आधार को लिंक कर सकते हैं। सरकार द्वारा विभिन्न पेंशन योजनाओं में पारदर्शिता और लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार लिंकिंग को महत्वपूर्ण बनाया गया है। पेंशन खाते…
वर्ष 2017 में विधानसभा चुनावों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी भाजपा गठबंधन की सरकार ने नौ वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इन नौ वर्षों में सरकार ने कानून व्यवस्था, सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा विकास के अनेक प्रतिमान गढ़े हैं। अपनी उपलब्धियों को जन जन तक पहुँचाने के लिए सरकार ने, ”नवनिर्माण के नौ वर्ष” नामक पुस्तक का प्रकाशन भी किया है। वर्ष 2017 के पूर्व उत्तर प्रदेश अराजकता के जाल में फंसा हुआ था। छोटी -छोटी बातों पर फसाद हो जाते थे। कानून और व्यवस्था की बुरी स्थिति के कारण निवेशक यहां आने से डरते थे। मुस्लिम तुष्टिकरण चरम पर था। लोग उल्टा प्रदेश कहकर प्रदेश का उपहास करते थे। 2017 में योगी जी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद से इस स्थिति में व्यापक परिवर्तन हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि अब प्रदेश की पहचान का संकट समाप्त हो चुका है,…
आजकल व्यक्तिगत पहचान के लिए आधार नम्बर का इस्तेमाल अनिवार्य हो चुका है। ऐसे में ऐन वक्त पर यदि आधार ऑथेंटिकेशन फेल हो जाए, तो लोगों के परेशान होना स्वाभाविक है। ऐसी समस्या प्रायः सर्वर डाउन होने या गलत नम्बर दर्ज रहने से आती है। जानकारों का कहना है कि आधार ओटीपी (OTP) न आने या ऑथेंटिकेशन फेल होने की समस्या आम है, जो मोबाइल नंबर, नेटवर्क या सर्वर से जुड़ी हो सकती है। इसलिए आइए हमलोग यहां जानते हैं कि इसका मुख्य कारण क्या है और इसका समाधान क्या हो सकता है। इस आम समस्या के मुख्य कारण की बात करें तो गलत या अपंजीकृत नंबर इसका पहला कारण समझा जाता है। आमतौर पर आधार से लिंक्ड मोबाइल नंबर किसी कारण बस बंद रहना, या उसका बदल जाना या फिर कभी लिंक ही न किया जाना इसकी वहज हो सकती है।इसे भी पढ़ें: क्या आप भी हैं किसी के लोन…
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पहली और दूसरी सूची जारी कर साफ संकेत दे दिया है कि इस बार वह आधी अधूरी तैयारी के साथ नहीं बल्कि पूरी ताकत, पूरी रणनीति और पूरी आक्रामकता के साथ मैदान में उतरी है। खासतौर पर दूसरी सूची में 111 उम्मीदवारों के नामों पर नजर डालने पर पता चलता है कि एक एक सीट पर गहरे मंथन के बाद उम्मीदवार तय किये गये हैं। हम आपको बता दें कि हिंगलगंज से रेखा पात्रा, खड़दह से कल्याण चक्रवर्ती, सोनारपुर दक्षिण से रूपा गांगुली, मथाभांगा से निसिथ प्रमाणिक, चोपड़ा से शंकर अधिकारी, बैरकपुर से कौस्तव बागची, कमरहाटी से अरूप चौधरी जैसे नाम सीधे चुनावी मुकाबले को और दमदार बना रहे हैं। इसके अलावा एंटाली से प्रियंका तिबरेवाल और मणिकतला से तपस रॉय जैसे उम्मीदवार राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखते हैं।अगर पहली सूची पर नजर डालें तो…
घर से बाहर दूसरे शहर में काम करने वाली कामकाजी महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है रहने-खाने के लिए एक सुरक्षित ठिकाने की खोज। इस समस्या का समाधान बिहार सरकार ने निकाला है। वहीं, पटना के IAS कॉलोनी, (रूपसपुर) में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास – ‘आकांक्षा’ का शुभारंभ किया गया है। मुजफ्फरपुर, पटना के बाद अब गयाजी, दरभंगा और भागलपुर में भी ऐसे ही छात्रावास खोलने की योजना है। इसका संचालन महिला बाल विकास निगम के तहत किया जाता है। इसमें 50 महिलाओ के रहने की सुविधा है। छात्रावास में अधीक्षक, सहायक अधीक्षक, रसोइया समेत अन्य आवश्यक कर्मी भी मौजूद होंगे।महंगे शहरों में पढ़ाई या नौकरी के दौरान सस्ती और सुरक्षित रहने की व्यवस्था बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में कई राज्य सरकारें और संस्थाएं कम लागत वाले छात्रावास संचालित करती हैं, जिनमें ‘आकांक्षा’ जैसे मॉडल खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। सीमित बजट, करीब 3000 रुपये मासिक…
आधुनिक बैंकिंग प्रणाली में बैंक लॉकर एक महत्वपूर्ण और सुरक्षित ग्राहक सुविधा है जहां कोई भी सक्षम ग्राहक अपने गहने, दस्तावेज़ और कीमती वस्तुएं रख सकते हैं। यह बैंक की एक मजबूत कोठरी में होता है और आरबीआई के नियमों द्वारा संचालित होता है। लिहाजा, बैंक लॉकर लेते समय यदि कुछ खास बातों को आप नजरअंदाज करेंगे तो बाद में पछताना भी पड़ेगा।सबसे पहले यह जान लीजिए कि बैंक लॉकर लेने के लिए ग्राहक का बैंक खाता होना जरूरी है। जबकि किराया लॉकर के आकार, स्थान (मेट्रो शहरों में अधिक और बैंक विशेष पर निर्भर करता है, जो आमतौर पर ₹1,000 से ₹10,000 सालाना प्लस जीएसटी होता है। इसके अलावा, आपको यह भी पता होना चाहिए कि लॉकर का समझौता हस्ताक्षरित होता है, जिसमें नामांकन या उत्तरजीविता क्लॉज का विकल्प रहता है। इसका लाभ उच्च सुरक्षा है क्योंकि चोरी, आग या डकैती से बचाव के लिए बैंक जिम्मेदार होता है। इसे…
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर दो दिग्गज नेताओं के आमने सामने आने से बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच यह मुकाबला केवल चुनावी लड़ाई नहीं बल्कि राजनीतिक इतिहास, व्यक्तिगत संबंधों और सत्ता की रणनीति का गहरा टकराव बन चुका है। पश्चिम बंगाल में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने शुभेंदु अधिकारी को न केवल नंदीग्राम बल्कि भवानीपुर से भी उम्मीदवार बनाकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।शुभेंदु अधिकारी वही नेता हैं जिन्होंने 2021 में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को बेहद करीबी मुकाबले में हराया था। उस चुनाव में ममता बनर्जी ने केवल एक सीट से चुनाव लड़ा था और हार के बाद उन्हें भवानीपुर से उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी करनी पड़ी थी। लेकिन इस बार स्थिति अलग है। भाजपा ने शुभेंदु को दो सीटों से मैदान में उतारकर ममता बनर्जी…
Supporting Student Journalist.
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