शिरीष बी प्रधान
काठमांडू, 30 अगस्त नेपाल में विनाशकारी आकस्मिक बाढ़ के कुछ दिन बाद रविवार को भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ गया, जिसके बाद अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित जिलों में खोज और बचाव अभियान में लगे कर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी में बुधवार को आई अचानक बाढ़ के दौरान भारी मात्रा में पानी मध्य नेपाल की ओर बह गया था। इस भीषण बाढ़ में व्यापक तबाही हुई है और मृतकों की संख्या बढ़कर करीब 700 पहुंच गई है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने एक बयान में कहा, ‘‘बाढ़ प्रभावित भोटेकोशी नदी का जलस्तर कुछ बढ़ गया है। सभी संबंधित लोगों से एहतियाती कदम उठाने का आग्रह किया जाता है।’’
प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में खोज एवं बचाव अभियान में लगे लोगों तथा अन्य संबंधित कर्मियों को सतर्क रहने को कहा है। एनडीआरआरएमए ने कहा कि अतिरिक्त जानकारी मिलने के बाद स्थिति के बारे में और जानकारी दी जाएगी।
नेपाल में बाढ़ के बाद अब भी शव मिलने का सिलसिला जारी है, वहीं बारिश फिर शुरू होने और नदियों का जलस्तर बढ़ने के बीच भी खोज एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार करीब 2,400 लोग अब भी लापता हैं। तलाश और बचाव अभियान के लिए 15,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।
वहीं, फंसे हुए लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर लगातार उड़ानें भर रहे हैं। अचानक आई बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे के इलाकों को प्रभावित किया था। इससे सड़कें, पुल, बस्तियां और जलविद्युत परियोजनाओं के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
नेपाल की सेना के सूत्रों के अनुसार, त्रिशूली जलविद्युत परियोजना स्थल पर भारी बारिश के बावजूद शनिवार आधी रात के बाद भी नेपाल के सुरक्षाकर्मी भारतीय सुरंग विशेषज्ञों की मदद से फंसे लोगों को निकालने के प्रयास में सुरंग के प्रवेश द्वार का पता लगाने की कोशिश करते रहे। एनडीआरआरएमए के अनुसार, शनिवार शाम तक भोटेकोशी बाढ़ में घायल हुए 242 लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल और बीर अस्पताल तथा धुंचे स्थित रसुवा जिला अस्पताल शामिल हैं।
प्राधिकरण ने बताया कि इनमें से 135 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, 29 को बेहतर इलाज के लिए अन्य विशेषज्ञ चिकित्सा केंद्रों में भेजा गया है, जबकि 75 लोगों का अभी उपचार हो रहा है। माना जा रहा है कि यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण आई। इससे पानी, कीचड़ और मलबे का विशाल प्रवाह मध्य नेपाल के कई जिलों में पहुंच गया, जिससे कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई।
बाढ़ के तेज बहाव में घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
