नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में हुई तेज और कम समय में भारी बारिश ने गंडक नदी को उफान पर ला दिया है। बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में हालात तेजी से बिगड़े हैं। कुशीनगर में नारायणी नदी के एपी तटबंध में ततवा टोला के पास देर रात टूटने से कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा गया। हालात की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात अधिकारियों से पल-पल की जानकारी ली और तत्काल राहत-बचाव अभियान शुरू कराने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के मंडलायुक्त, एडीजी और कुशीनगर के जिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों से स्थिति की पूरी जानकारी ली। उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, आपदा प्रबंधन की टीमों को सक्रिय करने तथा एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को व्यापक बचाव अभियान में लगाने के निर्देश दिए। प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव कार्य में जुट गईं।
लेकिन संकट केवल कुशीनगर तक सीमित नहीं है। नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ा और बिहार के पश्चिम चंपारण के बगहा में सोमवार को तटबंध में दरार ने खतरे को और बढ़ा दिया। वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर मंगलवार सुबह छह बजे नदी का बहाव 5,43,500 क्यूसेक तक पहुंच गया। नदी करीब 13 घंटे तक पांच लाख क्यूसेक से अधिक और 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक से अधिक बहाव पर रही। इससे पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली तक बाढ़ का दबाव बढ़ गया।
वहीं पश्चिम चंपारण के बगहा-1 प्रखंड में खैरटवा गांव के पास तटबंध में दरार के बाद प्रशासन ने निचले इलाकों में लगातार मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया। बताया गया कि नदी का जलस्तर अपने पिछले सर्वोच्च बाढ़ स्तर 90.90 मीटर से करीब 35 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया था। अगस्तिया, खैरटवा और चंद्रपुर गांवों के निचले इलाकों में पानी पहुंचने का खतरा पैदा हुआ। खेतों में पानी घुसने लगा और संपर्क मार्गों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि तटबंध स्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-727 पर तत्काल बड़े प्रभाव की आशंका कम बताई गई, क्योंकि संबंधित क्षेत्र में नदी का बहाव तेजी से घटने लगा था।
उधर, बिहार में भी प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चार बाढ़ प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया और राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। वैशाली, सारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज के प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के साथ उन्होंने दुमरियाघाट में गंडक के बढ़ते जलस्तर की स्थिति भी देखी। अधिकारियों ने बताया कि नदी खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर ऊपर थी और रात में जलस्तर में और वृद्धि की आशंका थी।
इस बीच, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि बारिश और बाढ़ से हुई तबाही के बीच राहत में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि बारिश से हुई जनहानि के मामलों में मृतकों के परिजनों को तत्काल मुआवजा दिया जाए। जिन परिवारों के मकान ढह गए हैं या जिनके पशुओं की हानि हुई है, उनका तत्काल आकलन कराकर जनप्रतिनिधियों के समन्वय से मुआवजा वितरित किया जाए।
किसानों के लिए भी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिया है। बर्बाद हुई फसलों का प्रशासन, कृषि विभाग और बीमा कंपनियां मिलकर तत्काल आकलन करें और किसानों को यथाशीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराएं। प्रभावित परिवारों को समयबद्ध सहायता देने और किसी भी तरह की हीलाहवाली न करने के निर्देश दिए गए हैं।
देखा जाये तो गंडक की इस बाढ़ ने एक बार फिर उत्तर बिहार की भौगोलिक संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। बिहार का करीब 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आने वाला माना जाता है। इस बार स्थिति इसलिए भी अलग है क्योंकि बिहार में कुल बारिश सामान्य से 35 प्रतिशत कम रही, जबकि उत्तर प्रदेश में यह कमी करीब तीन प्रतिशत रही। इसके बावजूद नेपाल से आने वाली नदियों के तेज बहाव ने उत्तर बिहार में संकट खड़ा कर दिया। हम आपको बता दें कि नेपाल से निकलने वाली कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती और उनकी सहायक नदियों का तेज बहाव उत्तर बिहार में बाढ़ का बड़ा कारण बनता है। ऐसे में नेपाल में बारिश, गंडक-नारायणी का बढ़ता जलस्तर और तटबंधों पर दबाव ने उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों के प्रशासन की परीक्षा तेज कर दी है। फिलहाल सबसे बड़ा लक्ष्य यही है कि पानी बढ़ने से पहले प्रभावित आबादी को सुरक्षित निकाला जाए और जहां तबाही हुई है, वहां राहत के साथ मुआवजे की प्रक्रिया भी जमीन पर तेजी से पहुंचे।
