मुंबई, चार सितंबर नागपुर के उपभोक्ता आयोग ने एक जीवन बीमा कंपनी को एक विधवा को 50 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि यदि मृतक ने बीमा पॉलिसी खरीदने से पहले ही शराब पीने की लत का खुलासा कर दिया था, तो बीमा दावे को खारिज करना ‘‘सेवा में कमी’’ माना जाएगा। उपभोक्ता मंच ने उच्चतम न्यायालय के उन आदेशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के आधार पर बीमा दावे को खारिज नहीं किया जा सकता, भले ही पॉलिसी-धारक ने इन्हें पहले से नहीं बताया हो।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (नागपुर) ने पिछले महीने दिए एक आदेश में, एडलवाइस टोकियो लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को शिकायतकर्ता के पति के कानूनी रूप से देय बीमा दावे को खारिज करने के मामले में ‘सेवा में कमी’ का दोषी ठहराया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसके पति ने अप्रैल 2021 में बीमा कंपनी की पॉलिसी खरीदी थी। 26 जनवरी 2023 को पति की अचानक हुई मृत्यु के बाद पत्नी ने बीमा दावे के लिए आवेदन किया था।
हालांकि, बीमा कंपनी ने दावे को खारिज कर दिया, पॉलिसी रद्द कर दी और महिला के पति द्वारा जमा की गई किस्तों की राशि का 18,713 रुपये का चेक वापस लौटा दिया। इसके बाद महिला ने दावा राशि और मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे की मांग को लेकर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का रुख किया था।
