(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, नौ अक्टूबर अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद प्रमिला जयपाल ने माइक्रोसॉफ्ट को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन के फैसले की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह कदम अमेरिका में कानूनी प्रवासन व्यवस्था को तहस-नहस करने जैसा है। अमेरिका ने बृहस्पतिवार को कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब समेत आठ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर दिया। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि इस व्यवस्था के कारण अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं।
वाशिंगटन राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाली जयपाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट प्रवासन व्यवस्था में सुधारों की वकालत करती रही है। कंपनी का मुख्यालय वाशिंगटन राज्य के रेडमंड में है। जयपाल की टिप्पणी को माइक्रोसॉफ्ट के बचाव के तौर पर देखा गया जिस पर उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस ने तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या समाजवाद का मतलब बड़ी कंपनियों के लिए कम वेतन पर काम करने वाले श्रमिकों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है?
वेंस ने बृहस्पतिवार को इस निलंबन की घोषणा करते हुए प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों और आउटसोर्सिंग फर्म से सेवाएं लेने वाली कंपनियों पर अमेरिकी श्रमिकों के हितों की अनदेखी कर वीजा व्यवस्था का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। सांसद जयपाल ने कहा कि ट्रंप प्रशासन लगातार उन कानूनी रास्तों को बंद कर रहा है, जिनके जरिए प्रवासी अपनी प्रतिभा और कौशल से देश के विकास में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला ऐसे ही कदमों की एक और कड़ी है।
जयपाल ने कहा, ‘‘आप कानूनी प्रवासन व्यवस्था को तहस-नहस करके एक खराब प्रवासन प्रणाली को ठीक नहीं कर सकते।’’
उन्होंने कहा, ‘‘स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (पीईआरएम) देश के विकास में योगदान देने की चाह रखने वाले अनगिनत कामगारों के लिए रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की दिशा में पहला कदम है। यह एक स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित करता है, जो सुनिश्चित करती है कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ मिले और स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसरों को नुकसान न पहुंचे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी अर्थव्यवस्था, समाज और परिवार प्रौद्योगिकी समेत तमाम क्षेत्रों में प्रवासियों पर निर्भर हैं। इस तरह के कठोर कदम एक मजबूत, स्थिर और विविध कार्यबल तैयार करने के प्रयासों को नुकसान पहुंचाते हैं।
इससे प्रवासियों के लिए अमेरिका आने के कानूनी रास्ते बंद होंगे, जबकि जरूरत ऐसे नियमों की है जो अमेरिकी कामगारों को शोषण करने वाले नियोक्ताओं से बचाएं और सभी को पारदर्शी तरीके से अवसर उपलब्ध कराएं।’’
जयपाल ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट या ‘पीईआरएम’ कार्यक्रम को इस तरह निशाना बनाने से केवल कानूनी प्रवासन व्यवस्था कमजोर होगी और अमेरिका की नवाचार क्षमता प्रभावित होगी।
