“अलापारा केलापारोम… थलाइवर निरंधारम!” – ‘जेलर’ के इस सुपरहिट ट्रैक ‘हुकुम’ की ये पंक्तियां सुपरस्टार रजनीकांत के उस सदाबहार आकर्षण को बयां करती हैं, जो आज भी भारतीय सिनेमा के बड़े पर्दे पर एकछत्र राज कर रहा है। 600 करोड़ रुपये कमाने वाली ब्लॉकबस्टर फिल्म का सीक्वल बनाना निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार के लिए एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन क्या ‘जेलर 2’ पहली फिल्म के जादू, स्वैग और Mass Appeal को दोहरा पाई है? आइए जानते हैं इस विस्तृत समीक्षा में।
कहानी: वहीं से शुरुआत जहां छूटा था सिरा
‘जेलर 2’ की कहानी ठीक वहीं से आगे बढ़ती है जहां पहली फिल्म खत्म हुई थी। टाइगर मुथुवेल पांडियन (रजनीकांत) और उनका परिवार अपने बेटे अर्जुन की मौत के गम से पूरी तरह उबरा भी नहीं है कि मूर्तियों की तस्करी करने वाला गिरोह उनके जीवन में फिर जहर घोल देता है।
वर्मन (विनायकान) की मौत का बदला लेने के लिए उसका साथी दिलीप (सूरज वेंजारामूडु) उस शख्स की तलाश में निकलता है जिसने यह हत्या की। यह तलाश उसे पूर्व जेलर ‘टाइगर’ तक ले आती है। अपने परिवार को बचाने के लिए टाइगर को इस बार एक बेहद खूंखार और बड़े सिंडिकेट का सामना करना पड़ता है, जिसे बोधि कल्पक (एसजे सूर्या), कांता कल्पक (विद्या बालन) और उनके पिता कल्पक (मिथुन चक्रवर्ती) चला रहे हैं।
निर्देशन और लेखन: ‘एब्सर्ड कॉमेडी’ और ‘मास मोमेंट्स’ का संतुलन
निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार की सबसे बड़ी ताकत उनकी ‘एब्सर्ड कॉमेडी’ (अजीबोगरीब हास्य) है, जो इस फिल्म में भी भरपूर है।
पहला हाफ (First Half): फिल्म की शुरुआत बेहद शांत और संयमित अंदाज में होती है, जहां ‘टाइगर’ टकराव से बचता है। लेकिन यह धीमापन बाद में आने वाले ‘मास मोमेंट्स’ (जैसे चाय की दुकान पर गोलीबारी और पुल का सीक्वेंस) के रोमांच को दोगुना कर देता है।
अनोखे किरदार: क्रूर लेकिन नासमझ गैंगस्टर मूर्ति (नमो नारायणन) और मलयाली तस्कर दिलीप (सूरज वेंजारामूडु) के किरदार कहानी में जबरदस्त कॉमेडी तड़का लगाते हैं।
दूसरा हाफ और कैमियो (Second Half): इंटरवल का ट्विस्ट शानदार है। हालांकि, दूसरे भाग में कहानी थोड़ी भटकती है और पहली फिल्म की याद दिलाती है। नेल्सन ने पुराने और नए कैमियो को बहुत ही समझदारी से शामिल किया है, हालांकि ऋतिक रोशन की एंट्री का प्रभाव थोड़ा फीका महसूस होता है।
अभिनय: रजनीकांत की स्क्रीन प्रेजेंस ही फिल्म की जान
रजनीकांत: थलाइवर एक बार फिर साबित करते हैं कि उनके जैसा स्वैग किसी के पास नहीं है। एक शांत पारिवारिक इंसान से खतरनाक ‘टाइगर’ बनने का उनका परिवर्तन बेहद सहज और दमदार है।
सह-कलाकार: एसजे सूर्या ने विलेन के रूप में बेहतरीन टक्कर दी है। सूरज वेंजारामूडु और नमो नारायणन की जुगलबंदी फिल्म के सबसे मजेदार हिस्सों में से एक है। विद्या बालन छोटे से रोल में भी अपनी छाप छोड़ती हैं, जबकि राम्या कृष्णन और योगी बाबू को सीमित स्पेस मिला है।
तकनीकी पक्ष और संगीत
संगीत: अनिरुद्ध रविचंदर का बैकग्राउंड स्कोर (BGM) हर सीन में जोश भर देता है। हालांकि, दो गाने रफ्तार वाली इस फिल्म में ‘स्पीड ब्रेकर’ का काम करते हैं, जिन्हें एडिट किया जा सकता था।
सिनेमैटोग्राफी व एडिटिंग: विजय कार्तिक कन्नन ने कोयंबटूर और गोवा के दृश्यों को भव्य रूप दिया है। फिल्म का रनटाइम 2 घंटे 45 मिनट है; यदि क्लाइमैक्स और आखिरी 20 मिनट की ट्रिमिंग (Editing) थोड़ी और कसी होती, तो फिल्म और असरदार बनती।
अंतिम फैसला (Verdict)
कमजोर क्लाइमैक्स और कुछ तार्किक कमियों के बावजूद, ‘जेलर 2’ मुख्य रूप से नेल्सन के अनोखे राइटिंग स्टाइल, वन-लाइनर्स और रजनीकांत के अजेय आकर्षण की वजह से एक पैसा वसूल कमर्शियल एंटरटेनर बनती है। भले ही यह पहली फिल्म जितनी बिल्कुल ‘ताज़ा’ न लगे, लेकिन थिएटर्स में सीटी बजाने के लिए इसमें भरपूर मसाला है। और हाँ, फिल्म का अंत ‘जेलर 3’ के लिए दरवाजे खुले छोड़ जाता है!
फिल्म: जेलर 2 (Jailer 2)
मुख्य कलाकार: रजनीकांत, एसजे सूर्या, सूरज वेंजारामूडु, विद्या बालन, मिथुन चक्रवर्ती, नमो नारायणन, योगी बाबू, राम्या कृष्णन और ऋतिक रोशन (कैमियो)
निर्देशक: नेल्सन दिलीपकुमार
संगीत: अनिरुद्ध रविचंदर
रेटिंग: 3.5/5 स्टार
