इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फ़ाउंडेशन ने मंगलवार को पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू करने की निंदा की। उन्होंने इसे सेना के समर्थन से सत्ता पर कब्ज़ा बताया और उस इलाके में लोकतांत्रिक अधिकारों को बहाल करने की मांग की। ‘X’ पर एक पोस्ट में, फ़ाउंडेशन ने इमरजेंसी के बाद इलाके के हालात पर कड़ी असहमति जताई, जिसमें सेना की मौजूदगी, पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की हिरासत और इंटरनेट बंद करना शामिल है। इस आदेश को वापस लेने की अपील करते हुए, फ़ाउंडेशन ने कहा कि अधिकारों को किसी आदेश से खत्म नहीं किया जा सकता। पोस्ट में लिखा था, सड़कों पर सैनिक, चुने हुए मुख्यमंत्री जेल में, इंटरनेट बंद: खैबर-पख्तूनख्वा में पाकिस्तान का इमरजेंसी शासन सेना के समर्थन से सत्ता पर कब्ज़ा है। सोहेल अफरीदी और हिरासत में लिए गए सभी नेताओं को रिहा किया जाना चाहिए। अधिकारों को किसी आदेश से खत्म नहीं किया जा सकता।
इसे भी पढ़ें: Khyber Pakhtunkhwa में आपातकाल के बाद Shehbaz Sharif ने बनाई 11 सदस्यीय निगरानी समिति
इससे पहले, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू करने के पाकिस्तान के फ़ैसले पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इन कदमों से मौलिक अधिकारों को नुकसान पहुँच सकता है, असहमति को दबाया जा सकता है और प्रांत में सेना की भूमिका बढ़ सकती है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के दक्षिण एशिया के डिप्टी डायरेक्टर बाबू राम पंत ने कहा कि प्रांत के मुख्यमंत्री समेत प्रमुख राजनीतिक नेताओं को मनमाने ढंग से हिरासत में लेने और पूरे प्रांत में इंटरनेट सेवा बाधित होने की खबरों ने इमरजेंसी उपायों की ज़रूरत और उनके उचित होने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसे भी पढ़ें: Khyber Pakhtunkhwa में Shehbaz Sharif सरकार ने लगाया आपातकाल, विपक्ष ने बताया बड़ी भूल
पंत ने कहा इमरजेंसी के उपाय मानवाधिकारों का दमन करने, असहमति को दबाने या सत्ता को केंद्रित करने का खुला अधिकार नहीं देते हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मानवाधिकारों से जुड़ी ज़िम्मेदारियों को निलंबित करने का कोई भी कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत तय सीमित परिस्थितियों में ही उठाया जाना चाहिए। राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने 11 अक्टूबर को संघीय कैबिनेट की उन सिफारिशों को मंज़ूरी दी, जिनके तहत पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत इमरजेंसी और अनुच्छेद 234 के तहत गवर्नर शासन लागू किया जाना था। सरकार ने प्रांत में “आतंकवादी हमलों की अभूतपूर्व हिंसा” और “संवैधानिक व्यवस्था के ठप होने का हवाला दिया। इमरजेंसी के प्रावधान पाकिस्तान की संघीय विधायिका को प्रांत से जुड़े कानून बनाने और मौलिक अधिकारों – जैसे इकट्ठा होने, संगठन बनाने और अभिव्यक्ति की आज़ादी – पर प्रतिबंध लगाने की इजाज़त देते हैं। राष्ट्रपति की अधिसूचना के तहत, संघीय संसद प्रांतीय विधानसभा की शक्तियों का इस्तेमाल करेगी। नई व्यवस्था के तहत, मुख्यमंत्री और प्रांतीय कैबिनेट के सदस्य – जिनमें मंत्री, सलाहकार और विशेष सहायक शामिल हैं। अपने पद पर नहीं रहेंगे। इसके बाद, रविवार को पुलिस ने स्वाबी ज़िले में कई जगहों पर छापेमारी की ताकि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (PTI) के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा सके और उस बड़ी रैली को रोका जा सके जिसे खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी रज़ार तहसील के शेवा अड्डा इलाके में संबोधित करने वाले थे। खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन और इमरजेंसी लागू होने के तुरंत बाद सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम और पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई।
