भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। दोनों महाशक्तियां एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को अंतिम रूप देने के ‘‘बेहद करीब’’ पहुंच चुकी हैं। यह समझौता पारस्परिक और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी शर्तों पर 1.4 अरब की आबादी वाले विशाल भारतीय बाजार को अमेरिकी वस्तुओं के लिए खोल देगा।अमेरिकी संसद परिसर ‘कैपिटल हिल’ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्रालय में उप सहायक मंत्री बेथनी पॉलोस मॉरिसन ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है। यह कार्यक्रम ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ (FIIDS) द्वारा आयोजित किया गया था।
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उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में ट्रंप और मोदी के बीच बनी सहमति के बाद शुरू हुई व्यापार वार्ताओं का उल्लेख किया और कहा, ‘‘ हम इस रिश्ते को बैठकों से नहीं, बल्कि परिणामों से माप रहे हैं।’’
मॉरिसन ने कहा, ‘‘ जब हमने फरवरी 2026 में व्यापार पर विचार किया, तो हमने इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की मंशा जताई थी। हम अब इसके बहुत, बहुत करीब हैं।’’
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उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारत के 1.4 अरब लोगों के बाजार को अमेरिकी वस्तुओं के लिए पारस्परिक एवं लाभकारी शर्तों पर खोलेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘ प्रशासन ‘मिशन 500’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य 2030 तक 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को हासिल करना है।’’
मॉरिसन ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर अंतरिम व्यापार समझौते पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ चर्चा के लिए भारत की यात्रा पर हैं।
