हम सभी को इस बारे में जानकारी है कि हर दिन पर्याप्त मात्रा में धूप लेना जरूरी होता है। इससे हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी होती है। लेकिन अक्सर लोग धूप के बीच के फर्क को नहीं पहचानते हैं। काफी कम लोगों को इस बारे में जानकारी है कि आखिर सुबह की धूप और शाम की धूप में क्या अंतर होता है और यह किस तरह से हमारे शरीर को प्रभावित करती है।
समझें बॉडी की सर्केडियन रिदम
हमारे शरीर में 24 घंटे चलने वाली एक आंतरिक घड़ी होती है, जो हमारे सोने-जागने और हार्मोन को बैलेंस करती है। जब यह सही तरह से काम कर रही होती है, तो हम दिन में जागने के साथ एक्टिव रहते हैं औऱ रात में भी अच्छे से नींद लेते हैं। लेकिन ऐसा न होने पर शरीर के काम करने का पूरा तरीका बदल जाता है। यहीं से हमारे जीवन में सूरज की रोशनी की भूमिका शुरू होती है।
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दरअसल, सूरज की रोशनी हमारे शरीर को दिन होने का संकेत देती है। जिससे हमारा इंटर्नल क्लॉक सही तरह से काम कर पाती है। वहीं सुबह और शाम दोनों समय की रोशनी हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।
क्यों जरूरी होती है सुबह की धूप
अगर आप सुबह-सुबह एक अंधेरे कमरे में सोकर उठते हैं और फिर थोड़ी देर फोन चलाते हैं और फिर इधर-उधर के काम निपटाते हैं, किचन में ब्रेकफास्ट बनाने के लिए जाते हैं। देखने में यह शेड्यूल एकदम सही है, लेकिन यहां एक परेशानी यह है कि हमारा दिमाग रोशनी न मिलने की वजह से उसको अंदाजा नहीं है कि सुबह हुई भी या नहीं। वहीं इससे विटामिन डी की पूर्ति भी नहीं हो पाती है।
सनलाइट का काम नहीं करती आर्टिफिशियल लाइट
अगर कमरे की आर्टिफिशियल लाइट को ऑन कर लिया जाए, तो भी यह सनलाइट की तरह काम नहीं करता है। इसलिए फोन को स्क्रॉल करने की जगह सुबह छत या बालकनी में जाकर सुबह की रोशनी लेनी चाहिए। इससे शरीर में सेरोटोनिन प्रोडक्शन बढ़ता है। दिमाग को सुबह होने का संकेत भी जाता है और शरीर नींद को कंट्रोल करता है, जिससे आपका शरीर एनर्जेटिक फील करता है। स्लीप मेडिसिन रिसर्च की मानें, तो सुबह की रोशनी सोने और जागने के चक्र को संतुलित करने का काम करता है।
क्यों जरूरी है शाम की रोशनी
आप सोच रहे होंगे कि शाम की रोशनी शरीर के लिए क्यों जरूरी है। दरअसल, शाम की रोशनी में सुबह की धूप जितनी ऊर्जा नहीं होती है। हल्की रोशनी दिमाग को नींद के लिए खुद को तैयार करने का संकेत देती है। इस समय सेरोटोनिन की जगह मेलाटोनिन हार्मोन लेवल बढ़ने लगता है। यह स्लीप साइकिल को बैलेंस करने के लिए भी जाना जाता है। रोजाना शाम की रोशनी में 5 से 10 मिनट वॉक करने से तनाव कम होता है और शरीर भी रिलैक्स फील करता है।
