(फिलेम दीपक सिंह)
काकामिगाहारा (जापान), चार अक्टूबर भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि उनकी टीम को भरोसा था कि वे विश्व कप की निराशा को पीछे छोड़कर एशियाई खेलों का खिताब जीतने के साथ 2028 ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर सकते है। हरमनप्रीत ने शनिवार को फाइनल में दो गोल किए जिससे भारत ने मलेशिया को 5-1 से हराकर लगातार दूसरी बार पुरुष हॉकी का स्वर्ण पदक जीता। हरमनप्रीत ने कहा, ‘‘फाइनल हर खिलाड़ी के लिए बड़ा मौका था।
कुछ खिलाड़ी पहली बार एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे जबकि कुछ चौथी, तीसरी या दूसरी बार खेल रहे थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें पता था कि हम यहां स्वर्ण पदक जीतने और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने आए हैं। लक्ष्य स्पष्ट था।’’
एशियाई खेलों से पहले भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। टीम ने अगस्त में बेल्जियम और नीदरलैंड में हुए विश्व कप में निराशाजनक नौवां स्थान हासिल किया था।
हरमनप्रीत ने कहा, ‘‘पूरा साल हमारे लिए बहुत कठिन रहा क्योंकि हमने कई टूर्नामेंट खेले। विश्व कप हमारे लिए अच्छा नहीं रहा लेकिन हमें पता है कि हम एशिया में हमेशा दबदबा रखते हैं। हम यहां अपने खिताब का बचाव करने आए थे।’’
हरमनप्रीत ने 11वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करके भारत को बढ़त दिलाई और 57वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर टीम की ओर से पांचवां गोल किया।
हरमनप्रीत लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों में भारतीय टीम को स्वर्ण पदक दिलाने वाले पहले भारतीय कप्तान बने। हॉकी खेलने की शुरुआत के बारे में पूछे जाने पर हरमनप्रीत ने कहा, ‘‘यह कोई योजना नहीं थी। जब मैं स्कूल में था तो चुनने के लिए कई खेल थे।
मैं हॉकी नहीं खेलना चाहता था, लेकिन हॉकी ने मुझे चुन लिया। और वहीं से मेरी यात्रा शुरू हुई।’’
गोलकीपर मोहित शशिकुमार ने कहा कि टीम 2028 ओलंपिक की तैयारी पूरी ताकत के साथ करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘हर खिलाड़ी का सपना ओलंपिक में खेलना होता है।
अब तैयारी शुरू होगी और हम पूरी ताकत के साथ तैयारी करेंगे। हमें उम्मीद है कि लॉस एंजिलिस में हम पदक जीतेंगे।’’
मोहित ने कहा, ‘‘टूर्नामेंट में उतार-चढ़ाव आए। हमारा ध्यान स्वर्ण पदक जीतने पर था।
उतार-चढ़ाव के बावजूद हमने हर मैच में अपना 100 प्रतिशत दिया।’’
चौबीस वर्षीय मोहित ने बताया कि उन्होंने 2024 पेरिस ओलंपिक में भारत को कांस्य पदक जीतते हुए टेलीविजन पर देखा था और इससे उन्हें सीनियर टीम में जगह बनाने की प्रेरणा मिली।
