(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, एक अक्टूबर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में खाद्य आपूर्ति श्रृंखला का हथियार की तरह इस्तेमाल करने और देशों की तरफ से खाद्य सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले वैध कदमों के बीच स्पष्ट अंतर करने की जरूरत पर बल दिया है।
गोयल ने वाशिंगटन से करीब 1,200 किलोमीटर दूर स्थित मिलवॉकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में कहा कि साझा लक्ष्य यह होना चाहिए कि भोजन सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग का स्रोत बना रहे।
उन्होंने कहा कि सभी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसानों के लिए अधिक अवसर पैदा करना भारत की नीति के केंद्र में है। भोजन का इस्तेमाल किसी भी देश पर दबाव बनाने के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
गोयल ने कहा कि वैश्विक संघर्षों से पैदा हुए खाद्य, ईंधन और उर्वरक संकट का सबसे अधिक असर वैश्विक दक्षिण के देशों पर पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘आज उर्वरक की कमी आगे चलकर खाद्य संकट का कारण बन सकती है।’’
गोयल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘हमें खाद्य आपूर्ति श्रृंखला का इस्तेमाल हथियार की तरह करने और घरेलू नीतिगत उद्देश्यों को पूरा करने तथा खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए देशों द्वारा उठाए जाने वाले वैध कदमों के बीच स्पष्ट अंतर करना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि भारत सार्वजनिक भंडार रखता है, छोटे एवं सीमांत किसानों से खरीद करता है और फसल की कमी होने पर खाद्य पदार्थों की उपलब्धता तथा उचित कीमत सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी और पारदर्शी कदम उठाता है।
गोयल ने कहा कि इन उपायों को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के तहत मान्यता हासिल है, जिसमें बाली मंत्रिस्तरीय निर्णय और जिनेवा मंत्रिस्तरीय घोषणा शामिल हैं।
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के बयान के मुताबिक, बैठक में शामिल मंत्रियों ने ‘जबरन व्यापार उपायों के जरिये भोजन के हथियार की तरह इस्तेमाल’ पर जी20 बयान के मसौदे पर सहमति जताई और इस मुद्दे पर सहयोग जारी रखने की इच्छा व्यक्त की।
इसके पहले, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जेमीसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका की जी20 अध्यक्षता के दौरान चार मुद्दों पर ध्यान दिया गया है। इनमें खाद्य का हथियार की तरह इस्तेमाल, संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता एवं उत्पादन, सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) सिद्धांत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम शामिल हैं।
ग्रीर ने कहा कि खाद्य, कृषि उत्पादों और कृषि इनपुट से जुड़े दबाव बनाने वाले व्यापार उपायों के अर्थव्यवस्थाओं और लोगों पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब गैर-बाजार नीतियों और तरीकों से घरेलू मांग से कहीं अधिक उत्पादन होता है, तो अतिरिक्त उत्पादन वैश्विक बाजारों में पहुंचकर दूसरे देशों के उत्पादकों और श्रमिकों पर दबाव डाल सकता है।
उन्होंने एमएफएन सिद्धांत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जबरन श्रम एक मानवीय मुद्दा होने के साथ व्यापार से जुड़ा मसला भी है।
