मुंबई में सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और जेपी मॉर्गन चेज के प्रमुख जेमी डिमोन की मुलाकात हुई। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत में बड़ी वैश्विक कंपनियां निवेश, उत्पादन और तकनीक से जुड़े अवसर तलाश रही हैं। जेपी मॉर्गन भी भारत में अपनी अलग-अलग कारोबारी टीमों और सेवाओं का विस्तार कर रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार, 21 सितंबर को मुंबई में जेपी मॉर्गन चेज के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेमी डिमोन से मुलाकात की। वित्त मंत्रालय के अनुसार यह मुलाकात जेपी मॉर्गन इंडिया निवेश सम्मेलन के दौरान हुई। दोनों के बीच हुई बातचीत ऐसे समय में हुई है जब भारत में वैश्विक कंपनियों की कारोबारी गतिविधियां और निवेश से जुड़ी रुचि बढ़ रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार जेमी डिमोन अपनी भारत यात्रा के दौरान देश के बड़े कारोबारी समूहों के अधिकारियों से भी मुलाकात करने वाले हैं। जेपी मॉर्गन पिछले कुछ वर्षों में भारत में अपनी टीमों का विस्तार कर रहा है। बैंक की गतिविधियों में निवेश बैंकिंग, भुगतान से जुड़ी सेवाएं और कंपनियों को वित्तीय सलाह देना शामिल है।
बता दें कि भारत जेपी मॉर्गन के लिए तेजी से महत्वपूर्ण बाजार बन रहा है। वर्ष 2025 में बैंक ने भारत में शेयर जारी करने से जुड़े कारोबार में सबसे अधिक हिस्सेदारी हासिल की थी। भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यहां कंपनियां पूंजी जुटाने के साथ-साथ दूसरे देशों में अपना कारोबार बढ़ाने के लिए भी बड़े सौदे कर रही हैं।
जेपी मॉर्गन इंडिया के वरिष्ठ देश अधिकारी राहुल बधवार ने कहा है कि बैंक को भारत में कई क्षेत्रों में कारोबार बढ़ने की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। इनमें सीमा पार कंपनियों की खरीद-बिक्री, नई अर्थव्यवस्था, मैन्युफैक्चरिंग, स्वास्थ्य सेवा, उपभोक्ता सेक्टर, वित्तीय सेवाएं और तकनीक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां विदेशों में अपना कारोबार बढ़ा रही हैं, जबकि बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही हैं।
गौरतलब है कि इसी वजह से कंपनियों को रणनीतिक सलाह, वित्त जुटाने और पूंजी बाजार से जुड़े विशेषज्ञों की जरूरत बढ़ रही है। भारत में कारोबार बढ़ाने की कोशिश कर रहे वैश्विक बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा भी तेज हुई है। गोल्डमैन सैक्स और एचएसबीसी होल्डिंग्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बैंक भी भारत में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहे हैं, खासकर कंपनियों की खरीद-बिक्री और विलय से जुड़े बड़े सौदों को देखते हुए।
निर्मला सीतारमण पहले भी विदेशी निवेशकों से भारत में उत्पादन इकाइयां, तकनीकी केंद्र और नए प्रयोग से जुड़े केंद्र स्थापित करने की अपील कर चुकी हैं। अगस्त में उन्होंने निवेशकों से भारत को केवल सामान बेचने वाले बाजार के रूप में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए उत्पाद और सेवाएं तैयार करने वाले केंद्र के तौर पर देखने को कहा था।
उन्होंने निवेशकों को भारत की बड़ी प्रतिभाशाली कार्यबल और यहां मौजूद कारोबारी अवसरों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया था। उनके अनुसार उत्पादन, तकनीक, नई खोज, उपभोक्ता क्षेत्र और लंबे समय के बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए भारत में अवसर मौजूद हैं।
गौरतलब है कि वित्त मंत्रालय हाल में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों तथा अधिकारियों के साथ भारत की विकास जरूरतों और निवेश बढ़ाने के रास्तों पर भी चर्चा कर चुका है। ऐसे में डिमोन और सीतारमण की मुलाकात को भारत में वैश्विक पूंजी, कारोबारी विस्तार और वित्तीय सेवाओं से जुड़े व्यापक माहौल के संदर्भ में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में नई साझेदारियां और निवेश की योजनाएं सामने आ सकती हैं।
