मुंबई, दो नवंबर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की पर्यावरण के अनुकूल दिवाली पहल के लिए अभिनेत्री दीया मिर्जा की ओर से बनाए गए वीडियो पर सोमवार को उस समय सियासी विवाद छिड़ गया, जब बीएमसी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता की आपत्ति के बाद इसे हटा दिया। वहीं, मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने इस वीडियो को लेकर दीया को “हिंदू-विरोधी” करार दिया। मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच बंबई उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद बीएमसी ने नागरिकों से पटाखे फोड़ने से बचने और पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाने की अपील की थी।
इस अभियान के तहत बीएमसी ने दीया समेत कई जानी-मानी हस्तियों को शामिल किया था। दीया ने वीडियो में लोगों से ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचने की अपील की थी। यह वीडियो रविवार को हटा दिया गया, जबकि अभिनेत्री माधुरी दीक्षित और निशिगंधा वाड तथा क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे के अभियान संबंधी वीडियो बीएमसी के ‘एक्स’ और इंस्टाग्राम पेज पर अब भी मौजूद हैं।
भाजपा की मुंबई इकाई के अध्यक्ष अमित साटम ने ‘एक्स’ पर बीएमसी के आधिकारिक अकाउंट को टैग करते हुए एक पोस्ट में दीया के वीडियो पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद इसे हटा दिया गया। भाजपा नेता ने लिखा, ‘‘हमें दीया मिर्जा से यह सीखने की जरूरत नहीं है कि दिवाली कैसे मनाई जाए। हमारी परंपराएं हमारी संस्कृति में गहराई से रची-बसी हैं।’’
साटम की टिप्पणी के कुछ ही घंटों के भीतर अश्विनी भिड़े के नेतृत्व वाली बीएमसी ने दीया का वीडियो अपने सोशल मीडिया पेज से हटा दिया।
वहीं, मुंबई की महापौर तावड़े ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘दीया मिर्जा हमेशा से विभाजनकारी ताकतों के साथ खड़ी रही हैं। उन्होंने नीट परीक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘ट्रोल’ किया था।’’
तावड़े ने कहा, ‘‘वह हमेशा से हिंदू-विरोधी रही हैं। हमने उन्हें प्रतिबंधित सूची में डाल दिया है।’’
विवाद से नाराज दीया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कोई पैसे नहीं लिये हैं।
भलाई का जमाना ही नहीं रहा।’’
दीया के वीडियो के साथ बीएमसी ने पोस्ट किया था कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथ पर पटाखे फोड़ने पर सख्त प्रतिबंध है। बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि दीया ने वीडियो में लोगों से दिवाली मनाते समय पर्यावरण और जन स्वास्थ्य का ध्यान रखने का आग्रह किया था। उन्होंने बताया कि अभिनेत्री का वीडियो रविवार सुबह 8:25 बजे पोस्ट किया था और इसे उसी रात हटा दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि पर्यावरण के क्षेत्र में किए गए काम को देखते हुए दीया इस अभियान से जुड़ने के लिए सबसे योग्य हस्तियों में से एक थीं। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें इस तरह के विरोध की उम्मीद नहीं थी। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने दीया को भारत के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सद्भावना दूत नियुक्त किया है।
विपक्षी नेताओं ने वीडियो हटाए जाने पर बीएमसी की आलोचना की। शिवसेना (उबाठा) की प्रवक्ता और पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर ने सवाल किया कि क्या बीएमसी प्रशासन ‘‘भाजपा या उसके मुंबई अध्यक्ष का गुलाम बन गया है।’’
पेडनेकर ने आरोप लगाया कि बीएमसी के रोजमर्रा के कामकाज में साटम का हस्तक्षेप ‘दिन-ब-दिन’ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को भाजपा नेता के कथित ‘‘सांप्रदायिक एजेंडे’’ के आगे नहीं झुकना चाहिए था।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के पार्षद यशवंत किल्लेदार ने साटम की आलोचना करते हुए कहा कि अगर भाजपा के मुंबई अध्यक्ष को पटाखे इतने पसंद हैं, तो पार्टी पदाधिकारियों को उनके आवास के बाहर जितने चाहें उतने पटाखे फोड़ने चाहिए। मनसे नेता ने सवाल किया, ‘‘हमारी दिवाली एक दीपक और एक लालटेन जलाकर भी मनाई जा सकती है। क्या भाजपा धर्म के नाम पर पटाखे फोड़ने का समर्थन करने वाले साटम के इस तरह के ‘पाखंडपूर्ण हिंदुत्व’ का समर्थन करती है?’’
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नीतेश राणे ने कहा, ‘‘दीया मिर्जा ने दिवाली के बारे में ट्वीट किया, लेकिन वह ईद, मुहर्रम या बकरीद के दौरान कभी ट्वीट नहीं करतीं और न ही ऐसी सलाह देती हैं।’’
राणे ने कहा, ‘‘उनके जैसे लोग सनातन हिंदू धर्म के खिलाफ हैं।
मैं इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा करूंगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने पर ध्यान दूंगा।’’
शिवसेना की प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा, ‘‘दीया मिर्जा, जिनके नाम का अर्थ ही रोशनी है, उन्हें पता होना चाहिए कि दिवाली को रोशनी का त्योहार कहा जाता है। सभी जानते हैं कि प्रदूषण के प्रति सतर्क रहने और पटाखे फोड़ने से बचने की जरूरत है।’’
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा, ‘‘दीया मिर्जा मुस्लिम समुदाय से हैं, लेकिन यह किसी विशेष समुदाय का मामला नहीं है। भारत में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान में हर धर्म को अपने त्योहार मनाने का अधिकार है।’’
आठवले ने कहा, ‘‘जिस तरह मुसलमान ईद मनाते हैं और रोजा रखते हैं, उसी तरह हिंदू समुदाय के लोग भी इन समारोहों में शामिल होते हैं।
अगर पटाखे नहीं चलाए जाते हैं, तो दिवाली अपना महत्व खो सकती है। हालांकि, हमें अत्यधिक प्रदूषण को लेकर भी चिंतित रहना चाहिए।’’
बीएमसी के उप महापौर संजय घडी ने दीया की अपील को हटाने के औचित्य पर सवाल उठाया और कहा कि उन्हें उनके संदेश में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं लगा।
