नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में 2020 में हुए दंगों और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों के बाद 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुई हिंसा की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने के अनुरोध वाली याचिकाओं को सोमवार को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने कहा, ‘‘फैसले में बताए गए कारणों के आधार पर सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं।’’
पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘‘याचिकाओं के इस समूह को दो हिस्सों में बांटा गया है। एक उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों से संबंधित है और दूसरा जामिया मिल्लिया के दंगों से।’’
उच्च न्यायालय ने इन याचिकाओं पर 24 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में अदालत विशेष जांच दल (एसआईटी), जांच आयोग या तथ्यों का पता लगाने वाली समिति गठित करने, चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने, मुआवजा देने और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने के अनुरोध वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। कुछ याचिकाओं में कथित भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध भी किया गया था। साथ ही, दंगों में हुई हिंसा और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का अनुरोध किया गया था।
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 700 लोग घायल हुए थे। अन्य याचिकाएं दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुई हिंसा से संबंधित थीं। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि छात्रों के साथ पुलिस बल द्वारा की गई कथित ज्यादतियों की जांच के लिए ऐसी एसआईटी की जरूरत है, जो पुलिस और केंद्र सरकार से स्वतंत्र हो।
