नयी दिल्ली, सात नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को शराब विक्रेता के रूप में दिखाने वाले एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार वीडियो को सोशल मीडिया मंचों से हटाने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने इस सामग्री को मानहानिकारक और आपत्तिजनक मानते हुए टिप्पणी की कि यह संवैधानिक पद पर आसीन एक महिला की गरिमा पर हमला है। उच्च न्यायालय ने यह आदेश गुप्ता की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।
गुप्ता ने उक्त वीडियो पर स्थायी रूप से रोक लगाने और आम आदमी पार्टी (आप) के आधिकारिक और सत्यापित सोशल मीडिया हैंडल से जारी एआई जनित तस्वीरों, वीडियो और पोस्टर की शृंखला को हटाने का निर्देश देने का आग्रह किया था। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने शुक्रवार को दिए आदेश में कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को सरकार की किसी नीति, फैसले या प्रशासनिक कार्रवाई की आलोचना करने का अधिकार है। लेकिन, किसी नीति के प्रति अपनी असहमति जताने की आड़ में, एआई जनित वीडियो की मदद से मुख्यमंत्री को अपमानजनक तरीके से पेश करना-जिससे उनकी गरिमा को ठेस पहुंचती हो-इसे किसी भी सूरत में स्वीकार्य राजनीतिक व्यंग्य नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि राजनीतिक व्यंग्य और आपत्तिजनक चित्रण के बीच हमेशा एक बहुत बारीक रेखा होती है। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘जब बात केवल हास्य या व्यंग्य की हो, तो अदालत शायद दखल न दे, लेकिन जब किसी व्यक्ति की गरिमा पर हमला किया जाए, उसे धूमिल किया जाए या उसका मखौल उड़ाया जाए, तो अदालत का यह कर्तव्य बन जाता है कि वह उचित कदम उठाए।’’
अदालत ने कहा कि सार्वजनिक पद पर रहने से स्वाभाविक रूप से अधिक जांच-परख की स्थिति बनती है, लेकिन किसी भी व्यक्ति की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। फैसले में कहा गया, ‘‘व्यंग्य भले ही किसी व्यक्ति की अंतरात्मा को ठेस पहुंचा सकता है, लेकिन इसे किसी की गरिमा पर ऐसा गहरा घाव करने की अनुमति नहीं दी जा सकती जिसे भरा न जा सके।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में, और हास्य व व्यंग्य के बहाने, किसी को भी इस तरह अपमानित करने या मज़ाक का पात्र बनाने की छूट नहीं दी जा सकती।’’
अदालत ने कहा कि आज के दौर में चित्रण की संभावनाएं असीमित हैं, लेकिन ऐसी कोई भी सामग्री तैयार करने और प्रकाशित करने की जिम्मेदारी इंसान के नियंत्रण में होती है, इसलिए उचित सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। न्यायाधीश ने कहा कि गुप्ता द्वारा दाखिल की गई याचिका प्रथम दृष्टया विचारणीय है और स्थिति उनके पक्ष में है। अदालत ने गुप्ता को अंतरिम राहत देते हुए टिप्पणी की कि सोशल मीडिया मंचों के जरिए सामग्री बिजली की गति से फैल सकती है, जिससे अपूरणीय क्षति हो सकती है।
अदालत ने सोशल मीडिया मंचों को निर्देश दिया कि वे याचिका में उल्लेखित छह यूआरएल तत्काल हटाएं। उच्च न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए चार दिसंबर की तारीख तय की है।
