शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने शनिवार को एक प्रस्ताव पास किया। इसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और गुरुग्राम में एक कथित वायरल वीडियो से जुड़े मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई। एसजीपीसी की जनरल हाउस मीटिंग के बाद इस फैसले की घोषणा करते हुए, SGPC के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि कमेटी ने मान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का फैसला किया है। उन पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, बेअदबी करने, अपने संवैधानिक पद का गलत इस्तेमाल करने, सबूत गढ़ने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करने और वायरल वीडियो मामले में तथ्यों को छिपाने का आरोप है। धामी ने कहा कि हम इस सिलसिले में पंजाब के डीजीपी से मिलेंगे। प्रस्ताव के अनुसार, SGPC ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि उसे अब तक इस विवाद पर मुख्यमंत्री की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
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यह घटनाक्रम पंजाब में कई जगहों पर जैसे होशियारपुर, लुधियाना, बठिंडा और अमृतसर में मुख्यमंत्री मान के सामाजिक बहिष्कार की मांग करने वाले होर्डिंग लगाए जाने के बीच सामने आया है। इन पोस्टरों में अकाल तख्त से सिख धर्मगुरुओं द्वारा 15 जून को जारी उस आदेश का ज़िक्र है, जिसमें एक विवादित वीडियो को लेकर मान को “गुरु द्रोही” (गुरु के विरोधी) और खालसा पंथ विरोधी घोषित किया गया था। अकाल तख्त ने इस साल जनवरी में मान को तलब किया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने कथित वीडियो क्लिप में गुरु की गोलक (गुरुद्वारे का दान पात्र) पर टिप्पणी की थी और सिख गुरुओं व मारे गए उग्रवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक गतिविधियां की थीं। होशियारपुर में कई जगहों पर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें होशियारपुर-चंडीगढ़ रोड पर बजरावार गांव के गुरुद्वारा हरियन वेलन के पास, छब्बेवाल बस स्टॉप के पास, माहिलपुर में गुरुद्वारा शहीदान लधेवाली के सामने, टुटो माजरा गांव, माहिलपुर के पुराने बस स्टैंड और दसूहा के गुरुद्वारा गरना साहिब शामिल हैं।
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15 जून को आदेश जारी करते हुए, अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने सिख समुदाय के सदस्यों को मान से कोई संबंध न रखने का निर्देश दिया था। मान ने गुरुद्वारों के बाहर बोर्ड लगाने को लेकर SGPC से सवाल किया। मान ने कहा कि गुरुद्वारों के बाहर ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं जिनमें लोगों से श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों का हवाला देते हुए मेरा बहिष्कार करने को कहा गया है; मैं और दुनिया भर की पूरी सिख संगत, श्री अकाल तख्त साहिब के सर्वोच्च अधिकार का पूरा सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब पूर्व अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल को “तनखैया” (धार्मिक कदाचार का दोषी) घोषित किया गया था, तब उनके खिलाफ ऐसे बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए थे।
