नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी), जल जीवन मिशन (जेजेएम) और मनरेगा के क्रियान्वयन के प्रदर्शन ऑडिट में बड़ी अनियमितताएं पाई हैं। मंगलवार को झारखंड विधानसभा में पेश कैग रिपोर्ट के मुताबिक, पीएमएवाई-जी योजना के तहत पात्र परिवारों की पहचान और लक्ष्य तय करने में खामियों के कारण 6.32 लाख से अधिक पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गए। रिपोर्ट कहती है कि नवंबर, 2022 तक राज्य में 22.34 लाख पात्र परिवारों की पहचान की गई थी।
लेकिन प्राथमिकता सूची में खामियों, राज्य द्वारा निर्धारित लक्ष्यों का इस्तेमाल नहीं कर पाने और आवास लाभार्थियों की सूची को अंतिम रूप देने में दो साल की देरी के कारण केंद्र ने केवल 16.02 लाख घरों का ही लक्ष्य आवंटित किया। झारखंड में 2016 से 2024 के बीच 15,92,124 घरों को मंजूरी दी गई और जनवरी, 2025 तक 15,62,249 घरों का निर्माण पूरा हो चुका था। कैग रिपोर्ट में इस योजना के वित्तीय प्रबंधन को भी अपर्याप्त बताया गया है।
राज्य में उपलब्ध 20,199.98 करोड़ रुपये की कुल धनराशि के मुकाबले 14,113 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वर्ष 2019 से 2024 के बीच धनराशि के इस्तेमाल का स्तर 55 से 83 प्रतिशत के बीच रहा। जल जीवन मिशन पर केंद्रित कैग रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने 24,360 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 98,067 योजनाओं को मंजूरी दी थी।
इनमें से 97,535 योजनाएं 24,665.29 करोड़ रुपये की सहमत लागत पर क्रियान्वयन के लिए ली गईं, लेकिन दिसंबर, 2024 तक केवल 27,249 योजनाएं पूरी हो सकीं। मार्च, 2025 तक राज्य के 62,53,471 ग्रामीण परिवारों में से 34,31,115 (55 प्रतिशत) को कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन मिले थे। यह राष्ट्रीय स्तर के 80 प्रतिशत कवरेज से कम था।
मनरेगा पर तैयार रिपोर्ट कहती है कि विभाग के प्रमाणित वित्तीय खातों और नरेगासॉफ्ट पोर्टल के आंकड़ों में अंतर पाया गया। वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच अकुशल श्रमिकों की 321.84 करोड़ रुपये की मजदूरी बकाया थी। समीक्षाधीन अवधि के दौरान काम के लिए प्रस्तावित 1,02,68,484 कार्यों में से मार्च, 2024 तक केवल 27,96,044 (27 प्रतिशत) पूरे हुए थे, जबकि 50,21,492 (49 प्रतिशत) कार्य अधूरे थे।
इन कार्यों पर 2,633 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
